बैंक अथवा वित्तीय संस्था से ऋण लेकर उसकी राशि अदा नहीं करना अब ऋणधारकों के लिए भारी पड़ सकता है। रतलाम न्यायालय द्वारा एक बजावरी/ डिक्री निष्पादन प्रकरण में ऋण की राशि अदा नहीं करने पर ऋणधारक एवं गारंटर के विरुद्ध सिविल जेल वारंट की कार्रवाई की गई है।
श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड, रतलाम की ओर से प्रस्तुत प्रकरण में जिला एवं सत्र प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीश, रतलाम की अदालत द्वारा डिक्री की राशि की वसूली के लिए ऋणधारक एवं गारंटर के विरुद्ध सिविल जेल वारंट जारी किया गया था।
न्यायालय द्वारा जारी वारंट की तामीली डिक्रीधारी कंपनी श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड, रतलाम की निशानदेही पर की गई। वारंट की तामीली के दौरान मद्यून क्रमांक-01 (ऋणधारक) को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय द्वारा ऋणधारक से डिक्री की राशि अदा करने के संबंध में पूछा गया, किंतु ऋणधारक गुड्डू गामड निवासी ग्राम पलास तह. व जिला रतलाम द्वारा राशि अदा करने से इनकार किया गया। इसके पश्चात न्यायालय द्वारा उसे सिविल जेल भेजे जाने का आदेश पारित किया गया तथा दिनांक 16 सितंबर 2026 को उसे जिला सकील जेल, रतलाम भेज दिया गया।
वहीं, मद्यून क्रमांक-02 (गारंटर) रामचन्द्र भाभर के विरुद्ध भी सिविल जेल वारंट जारी है।
- क्या है पूरा मामला?
निवासी ग्राम पलास तह. व जिला रतलाम निवासी गुड्डू गामड़, द्वारा श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की रतलाम शाखा से वाहन क्रय करने हेतु ऋण लिया गया था। ऋण की राशि निर्धारित शर्तों के अनुसार अदा नहीं किए जाने पर कंपनी द्वारा विधिक कार्रवाई प्रारंभ की गई।
श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की ओर से रीजनल कलेक्शन हेड श्री संजय पंड्या, कलेक्शन एवं शाखा प्रबंधक श्री जयदीप सिंह राठौर के मार्गदर्शन में कंपनी के अधिवक्ता श्री यशपाल कुमार के माध्यम से एकल मध्यस्थ एवं सुलह अधिनियम के अंतर्गत अधिकरण के समक्ष विधिक कार्यवाही की गई। प्रकरण में कंपनी की ओर से अपना पक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया, जिसके पश्चात माननीय अधिकरण द्वारा कंपनी के पक्ष में डिक्री पारित की गई।
अपीलिय अवधि समाप्त होने उपरान्त उक्त डिक्री के निष्पादन हेतु प्रकरण जिला एवं सत्र अतिरिक्त न्यायाधीश, रतलाम के समक्ष प्रस्तुत किया गया। डिक्री के निष्पादन के दौरान मद्यूनगणो के विरूद्ध देनदारों की उपस्थिति एवं डिक्री की राशि की वसूली के लिए न्यायालय द्वारा कई आदेशिकाएँ जारीकी गईं। इसके बावजूद ना तो मद्यूनगण उपस्थित हुए ओर ना राशि का भुगतान किया ततपश्चात निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर न्यायालय द्वारा सिविल जेल वारंट जारी किया गया।
उक्त वारंट की तामीली के पश्चात मद्यून क्रमांक-01 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया तथा न्यायालय के आदेशानुसार दिनांक 16 सितंबर 2026 को उसे जिला जेल, रतलाम भेज दिया गया। मध्यस्थ क्रमांक-02 (गारंटर) के विरुद्ध भी सिविल जेल वारंट जारी है।
श्रीराम फाइनेंस की ओर से प्रभावी पैरवी उक्त प्रकरण में न्यायालय के समक्ष श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की ओर से पैनल अधिवक्ता श्री हेमराज कसेडिया, अधिवक्ता श्री भरत गिरि एवं अधिवक्ता श्री यशपाल कुमार द्वारा प्रभावी रूप से पक्ष रखा गया।
डिफॉल्टरों के लिए कड़ा कानूनी संदेश
यह कार्रवाई उन ऋणधारकों के लिए महत्वपूर्ण संदेश है, जो बैंक अथवा वित्तीय संस्थाओं से ऋण प्राप्त करने के बाद निर्धारित शर्तों के अनुसार ऋण की किश्तों अथवा डिक्री की राशि का भुगतान नहीं करते हैं। न्यायालय द्वारा डिक्री के निष्पादन में की गई यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि विधिक प्रक्रिया के तहत ऋण की वसूली के लिए उपलब्ध न्यायिक उपायों का प्रभावी रूप से उपयोग किया जा सकता है।
श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की ओर से ऋणधारकों से अपील की गई है कि वे अपने ऋण खातों में नियमित भुगतान करें तथा किसी भी प्रकार की वित्तीय कठिनाई होने पर संबंधित शाखा से समय रहते संपर्क कर समाधान प्राप्त करें।
