*पारंपरिक सिन्धी गरबा महोत्सव का आज होगा समापन, गरबा एवं छैज नृत्य बना आकर्षण का केंद्र…*

*कुलदेवी माता हिंगलाज रानी की आरती के भव्य दरबार ने मोहा श्रद्धालुओं का मन…*
खंडवा। सिन्धी समाज की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और पारिवारिक एकता को समर्पित पारंपरिक सिन्धी गरबा महोत्सव उत्साह एवं उल्लास के साथ अपने अंतिम दिन में प्रवेश कर चुका है। सिन्धी कॉलोनी स्थित श्री झूलेलाल मंदिर के सामने आयोजित इस छह दिवसीय महोत्सव में पारंपरिक गरबा एवं सिन्धी समाज के विशिष्ट लोकनृत्य छैज की प्रस्तुतियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
महोत्सव के बीते पाँच दिनों में समाजजनों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर भक्ति, संस्कृति और परंपरा के इस उत्सव को जीवंत बनाया। आयोजन का शुभारंभ माता हिंगलाज भवानी के दरबार की स्थापना, विधिवत पूजन एवं महाआरती के साथ किया गया। इसके पश्चात प्रतिदिन कुलदेवी माँ हिंगलाज माता की आरती के उपरांत गरबा आयोजन प्रारंभ किया गया।
महोत्सव के दौरान विभिन्न दिनों में संत-महात्माओं एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अतिथियों की उपस्थिति में माता की आरती संपन्न हुई…सिन्धी समाज के महंत बाबा स्वरूपदास साहेब तथा स्वामी शांति प्रकाश आश्रम के पूज्य संत रमेशप्रकाश जी महाराज की उपस्थिति में आरती की गई। भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष सागर आरतानी भी आयोजन में उपस्थित रहे और आरती में सहभागिता की।
महोत्सव को अधिक उत्साहपूर्ण एवं सहभागी बनाने के लिए प्रतिदिन विभिन्न श्रेणियों में विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए जा रहे हैं। पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य-कौशल और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के आधार पर प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पुरस्कारों के लिए निर्णायक की भूमिका शेखर चंदवानी, सोना वासवानी, पवन वासवानी एवं मानसी आरतानी निभा रहे हैं, जो प्रतिदिन की प्रस्तुतियों के आधार पर अपना निर्णय देते हैं।
आयोजन समिति के मेठाराम पिंजानी एवं मनीष कुमार मलानी ने बताया कि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को सिन्धी संस्कृति, लोकपरंपराओं एवं धार्मिक मान्यताओं से जोड़ना तथा समाज में आपसी सद्भाव, पारिवारिक सहभागिता और एकता को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक गरबा एवं छैज जैसे लोकनृत्य केवल मनोरंजन के माध्यम नहीं, बल्कि सिन्धी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के संवाहक हैं।
महोत्सव में विशेष सहयोग की भूमिका में डॉ. दिलीप हिंदूजा, घनश्याम संतवाणी, अनिल आरतानी, अशोक नवानी, राजेश परचानी, हरि बुलानी, द्वारकादास मोहनानी, राम वासवनी, राजू तीर्थानी, मनोहर संतवानी, महेश चंदवानी, कमलेश पमनानी एवं जयपाल लालवानी ने सहयोग प्रदान किया है…
इसके साथ ही आयोजन को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने तथा विभिन्न व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग देने वाले प्रमुख कार्यकर्ताओं में गोटू लालवानी, हनी मेघवानी, अभिषेक मंगवानी, विशाल चंचलानी, मोनू लालवानी, निक शाहनी, अमित वैणानी, मोहित मनवानी, बाबू बिनवानी, नरेश लालवानी, जय मंगवानी, विकास मोटवानी, ओमी मनवानी, कमल बजाज, राहुल चंचलानी, यश दुल्हानी, साहिल गिदवानी एवं करण बजाज सहित अन्य युवा कार्यकर्ताओं का योगदान सराहनीय रहा है।
आयोजन समिति ने सभी सहयोगियों, प्रतिभागियों एवं समाजजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक सहभागिता और सहयोग से ही इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन भव्य एवं सफल बनते हैं। महोत्सव का अंतिम दिन भी पारंपरिक गरबा, छैज नृत्य एवं सांस्कृतिक उत्साह के साथ संपन्न होगा।
