गुरुजनों से मिले तो लौट आया स्कूल का वह पुराना दौर
मोतीलाल नेहरू स्कूल के शताब्दी वर्ष पर गुरु-शिष्य मिलन समारोह, 1973-74 से 1989-90 तक के करीब 220 विद्यार्थी हुए शामिल
खंडवा। “बैठ के रास्ता देखूं श्री गुरुवर, तेरे आने का…” इन भावपूर्ण पंक्तियों के साथ मोतीलाल नेहरू स्कूल के शताब्दी वर्ष पर आयोजित गुरु-शिष्य मिलन समारोह में वर्षों पुरानी यादें फिर जीवंत हो उठीं। किशोर कुमार सभागृह में आयोजित समारोह में वर्ष 1973-74 से 1989-90 तक के करीब 220 पूर्व विद्यार्थी अपने गुरुजनों के साथ शामिल हुए।
समारोह की शुरुआत स्कूल परिसर से हुई। पूर्व विद्यार्थी निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचे, प्रार्थना की और अपनी पुरानी कक्षाओं में बैठकर बीते दिनों को याद किया। स्कूल परिसर में आज भी खड़े पुराने पेड़ों को देखकर विद्यार्थियों की यादें ताजा हो गईं। इन्हीं पेड़ों की छांव में कभी वे बैठकर भोजन किया करते थे। स्कूल की कक्षाओं, परिसर और पुराने वातावरण ने सभी को अपने विद्यार्थी जीवन में वापस पहुंचा दिया।
इसके बाद सभी पूर्व विद्यार्थी किशोर कुमार सभागृह पहुंचे। यहां गुरुजनों के पहुंचते ही विद्यार्थी अपनी कुर्सियों से खड़े होकर उनका स्वागत करने लगे। दुबे सर, श्रीमती विमला तिवारी, डोंगरे सर, बीके शर्मा, श्री गीते, श्रीमती शर्मा और रुबिया अली सहित गुरुजनों का गुलाब की पंखुड़ियों से स्वागत किया गया। तालियों की गड़गड़ाहट से सभागृह गूंज उठा। गुरुजनों को मंच पर आसीन कर मां सरस्वती का माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन किया गया।
गुरुजनों ने सुनाए पुराने किस्से
समारोह में गुरुजनों ने विद्यार्थियों के साथ अपने पुराने अनुभव साझा किए। किसी ने विद्यार्थियों को डांटने, कभी अनुशासन के लिए सजा देने, कापियां जांचने और स्कूल परिसर में घूमते हुए विद्यार्थियों को समझाने के प्रसंग सुनाए तो किसी ने अपने पुराने विद्यार्थियों को वर्षों बाद सामने देखकर भावुकता साझा की।
गुरुजनों ने कहा कि समय के साथ सभी विद्यार्थी अपने-अपने क्षेत्र में आगे बढ़ गए हैं। कोई व्यवसाय में है तो कोई अलग-अलग जिम्मेदारियों पर पहुंचा है। विद्यार्थियों की सफलता देखकर उन्हें खुशी होती है। इस अवसर पर श्री शर्मा सर ने मंच पर ही विद्यार्थियों को एनसीसी की परेड की यादें ताजा करा दीं।
सभी गुरुजनों को दुपट्टा पहनाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
‘स्कूल छूट गया, यादें नहीं’
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राकेश सोनी एवं मनोज सोनी (जौहरी) ने किया। डॉ. राकेश सोनी ने कहा कि शायद अगले दिन जिंदगी फिर अपनी रफ्तार पर लौट जाएगी, लेकिन यह दिन हमेशा याद रहेगा। साल बीत गए, लेकिन दोस्ती नहीं बीती और स्कूल छूट गया, लेकिन स्कूल की यादें आज भी साथ हैं।
मनोज सोनी ने अपने चुटीले अंदाज में स्कूल के दिनों का किस्सा सुनाया तो सभागृह में हंसी गूंज उठी। उन्होंने कहा कि जब गुरुजन पढ़ाते थे, तब विद्यार्थी कभी-कभी खिड़की से बाहर झांककर अपनी पसंद की किसी छात्रा को देखा करते थे। इस पर गुरुजन और पूर्व विद्यार्थी भी मुस्कुरा उठे। रितेश गुप्ता, राजेश गगराड़े और अनूप ने भी स्कूल जीवन से जुड़ी यादें साझा कीं।
इसके बाद सभी ने सहभोज किया और पूर्व विद्यार्थियों ने भावुक मन से गुरुजनों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया।
गीत-संगीत पर झूमे पूर्व विद्यार्थी
गुरुजनों की विदाई के बाद समारोह का माहौल फिर मस्ती और गीत-संगीत से भर गया। सत्येंद्र कुमुद ने ‘सारा देश हमारा’ गीत प्रस्तुत किया। बेच प्रभारी दिनेश सोनी, रूपेश पालीवाल, राजेंद्र शुक्ला और दिनेश शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा से जुड़े अनुभव साझा किए।
आशीष भंसाली, राजेश पटेल, उपेंद्र खेड़ेकर सहित अन्य पूर्व विद्यार्थियों ने कराओके पर गीत प्रस्तुत किए। कुछ ही देर में गीत-संगीत के बीच पूर्व विद्यार्थी झूमने और नृत्य करने लगे। सभी विद्यार्थियों को दुपट्टा पहनाकर ‘अविरल मधुर यादें’ स्मृति चिह्न भेंट किए गए।
कार्यक्रम के अंत में उन गुरुजनों और मित्रों को श्रद्धांजलि दी गई, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। इसके बाद रात्रि भोज हुआ। ‘अभी अलविदा मत कहो दोस्तों, न जाने कहां फिर मुलाकात हो’ गीत के साथ पूर्व विद्यार्थियों ने एक-दूसरे से विदाई ली और अपनी-अपनी राहों पर लौट गए। मनोज सोनी (जौहरी) ने सभी का आभार व्यक्त किया।
