रेलवे ब्रिज की मुंडेर बनी ‘पक्षियों की भोजनशाला’, श्राद्ध पक्ष में सज रही जीवों के लिए भोजन की थाली
शहर में घटते पेड़-पौधों और कम होते पक्षियों के बीच आस्था के साथ जीवदया की मिसाल,
कौवे ही नहीं, चिड़िया, तोते कबूतर और कोयल भी पहुंच रहे भोजन के लिए
खंडवा। जब शहरों में सीमेंट और कंक्रीट बढ़ रहे हों, पेड़-पौधों और पक्षियों के लिए जगह लगातार कम होती जा रही हो, तब किसी मुंडेर पर रखी एक छोटी-सी भोजन की थाली भी बड़ी सीख दे जाती है। खंडवा के रेलवे ओवरब्रिज पर इन दिनों ऐसा ही दृश्य दिखाई दे रहा है। श्राद्ध पक्ष में लोग अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में भोजन लेकर यहां पहुंच रहे हैं और उसे कौवों सहित दूसरे पशु-पक्षियों के लिए रख रहे हैं। कुछ ही देर में सूनी मुंडेर पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार हो जाती है।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष के दौरान दिवंगत परिजनों की स्मृति में तर्पण और भोजन कराने की परंपरा है। इसी क्रम में कौवे को भोजन कराने की मान्यता भी है। शहर में आम दिनों में कौवे कम दिखाई देते हैं, लेकिन श्राद्ध पक्ष शुरू होते ही रेलवे ब्रिज और आसपास के पेड़ों पर इनकी मौजूदगी नजर आने लगती है।
थाली में पूरी-सब्जी से लेकर पोहा और बिस्किट तक
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि श्रद्धालु घरों से तैयार भोजन लेकर रेलवे ब्रिज पर पहुंचते हैं। मुंडेर पर कौवों और अन्य पक्षियों के लिए पूरी-सब्जी, हलवा, जलेबी के साथ पोहा, बिस्किट, ब्रेड और अन्य खाद्य सामग्री रखी जाती है। भोजन के साथ पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था भी की जाती है।
कौवों के अलावा चिड़िया, तोते, कबूतर और कोयल भी यहां पहुंचकर भोजन ग्रहण करते हैं। श्रद्धालु कुछ दूरी पर खड़े होकर पक्षियों को भोजन करते देखते हैं। मान्यता है कि कौवे को भोजन कराने से दिवंगत आत्माओं को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
आस्था के साथ जीवदया का संदेश
सुनील जैन ने बताया कि बदलते शहर और घटते प्राकृतिक ठिकानों के बीच पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था अब केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवों के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देती है। रेलवे ब्रिज पर पिछले तीन-चार वर्षों से लोग पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी रख रहे हैं। श्राद्ध पक्ष ही नहीं श्रद्धालु प्रतिदिन आकर कुछ न कुछ खाद्य सामग्री रेलवे ब्रिज की मुंडेर पर रखकर पुण्य प्राप्त रहे हैं।
श्राद्ध पक्ष में जहां यह परंपरा विशेष रूप से दिखाई देती है, वहीं सालभर भी कई लोग यहां पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था करते हैं।
कौवों की मौजूदगी ने दिलाई पुराने शहर की याद
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में ब्रिज पर लगातार चलते आवागमन के बीच एक साथ कई कौवों और पक्षियों का जुटना लोगों का ध्यान खींच रहा है। खासकर ऐसे समय में जब शहर के कई हिस्सों में पहले की तुलना में पक्षियों की मौजूदगी कम नजर आती है, यह दृश्य प्रकृति के साथ रिश्ते की याद दिलाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह दिवंगत परिजनों की स्मृति से जुड़ी आस्था है, वहीं पक्षियों के लिए भोजन और पानी का सहारा।
एक मुट्ठी दाना, एक कटोरी पानी और थोड़ी-सी संवेदना—शहर में रहने वाले बेजुबान जीवों के लिए इतना ही काफी है।
