क्षमावाणी महोत्सव में तपस्वियों एवं समाज के वरिष्टों का हुआ सम्मान।

क्षमा वीरों का आभूषण है क्षमा से अपराधों पर काबू पाया जा सकता है, ,,एसपी अगम जैन,,
जो काम सजा देने के साथ भी एक अदालत नहीं कर सकती वह काम भीगे भावों से क्षमावाणी पर्व कर देता है, ,,अंशिका दीदी,,
खंडवा। गलती हमारा स्वभाव होता है,प्रत्येक प्राणी से भूलवश, अज्ञानतावश कोई न कोई ऐसे कार्य हो जाते हैं जो दूसरों को ठेंस पहुंचाते हैं। हम हमारे मन में क्रोध की भावना न रखते हुए उन प्राणी मात्र से क्षमायाचना कर ले यही हमारा क्षमा धर्म है। की गई गलती को स्वीकार करना ही क्षमा है, क्षमा का गुण सदैव हमारे मन में मन में होना चाहिए, क्षमा उपर से नहीं हृदय से मांगना चाहिए। अपने हृदय को इतना विशाल बनाओ की उसमें सभी समा जाएं,यह बात क्षमा वाणी महोत्सव मैं मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए जिले के कप्तान पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने कहीं, एसपी श्री जैन ने कहा कि क्षमा सबसे बड़ा धर्म है क्षमा के पालन से हम कई प्रकार के विवादों से बच सकते हैं, क्षमा वीरस्य भूषणम् क्षमा वीरों का आभूषण है इसका पालन करें। अधिकांश देखने में आता है थाने में अधिकांश के मामले पारिवारिक होते हैं कहीं घर विवाद, जमीन विवाद के मामले ज्यादा आते हैं, यदि परिवार में ही आपसी समन्वय हो जाए और गलतियों की आपसी में क्षमा मांग ली जाए तो इन अपराधों में कमी आ सकती है, समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि क्षमा वाणी महोत्सव रविवार को शाम 6:00 बजे से 8:00 बजे तक बजरंग चौक स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर परिसर में बड़े धार्मिक उत्साह के साथ सांगानेर से पधारी अंशिका एवं वारिधी दीदी के साथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल पुलिस अधीक्षक अगम जैन की उपस्थिति में मनाया गया। सर्वप्रथम भगवान का अभिषेक एवं शांति धारा की गई, बड़ी संख्या में उपस्थित सामाजिक बंधुओ ने कार्यक्रम के समापन पर एक दूसरे से क्षमा याचना की, क्षमा धर्म पर प्रवचन देते हुए अंशिका दीदी ने कहा कि क्षमा काफी महान है और अहंकार और क्रोधवश किए गए अपराध को क्षमा से ही हम दूर कर सकते हैं। वर्षो पुरानी बैर बुराई की ग्रंथि, गांठ को खोलकर विरोधी से भी पश्चाताप पूर्वक क्षमा भाव से स्नेहपूर्वक गले मिलना क्षमावाणी पर्व की सबसे बड़ी उपलब्धि है। अंशिका दीदी ने कहा कि जो काम सजा देने के साथ भी एक अदालत नहीं करा सकती, वह काम भीगे भावों से भरा यह क्षमावाणी पर्व करा देता है। याद रखें सदियों से यह क्षमा मांगने का क्रम चल रहा है, ,,जो क्षमा वचन में लाता है, समझो धर्म निभाता हैं, श्रेष्ठ वही कहलाता है ज्येष्ठ वही कहलाता है,, मकान को कितना भी साफ कर लो धूल रह जाती है मनुष्य कितना भी बड़ा हो जाए भूल हो जाया करती है, इस पर्व के पहले दिन हमने उत्तम क्षमा धर्म को अपनाया और इस आत्मा विशुद्धि के पर्व के अंतिम दिन भी क्षमावाणी पर्व हम मनाते हैं। दो बार क्षमा पर्व क्यों मनाते है? पहला पर्व इसलिए कि हम दूसरों पर क्रोध न करें। अंतिम पर्व आता है कि पहले किसी पर क्रोध हुआ हो, किसी से बैर हुआ हो, उसको निकालकर हम क्षमा कर दें और क्षमा मांग लें। समाज के सचिव सुनील जैन बताया कि कार्यक्रम का का शुभारंभ मंगलाचरण एवं अतिथि एसपी जैन के साथ ट्रस्टियो द्वारा भगवान महावीर के फोटो के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ समाज के आलोक सेठी राजेंद्र छाबड़ा अभय जैन विजय सेठी द्वारा क्षमा विषय पर उद्बोधन दिया गया। इसके पश्चात पुलिस अधीक्षक अगम जैन एवं समाज के ट्रस्टी अध्यक्ष दिलीप पहाड़िया, सचिव सुनील जैन, कोषाध्यक्ष पवन रावका, राजेंद्र छाबड़ा, एवं ट्रस्ट मंडल मंडल सदस्यों के द्वारा 10 उपवास करने वाले ऋषभ कैलाश गंगवाल श्रीमती रागनी अनिल जैन के साथ ही 7, 5 और 3 उपवास करने वाले सभी तपसियों का सम्मान किया गया। अध्यक्ष दिलीप पहाड़िया द्वारा समाज में गए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के विषयों को प्रस्तुत किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शानदार प्रस्तुति अर्पिता रावका, रूपल लोहाडिया, मेघा पहाड़िया, आशा जैन, अहिंसा पहाड़िया और बच्चों में मिस्टी गदीया, आरना, भाविक, ऋत्विक जैन द्वारा दी गई। कार्यक्रम का सफल संचालन पंकज छाबड़ा ने किया एवं आभार सचिव सुनील जैन ने माना।
