संपादक/तनिश गुप्ता
आत्म संयम के बिना मुक्ति नहीं क्रोध कषायों को रोक देना ही संयम है, “संजय शास्त्री”
पयूर्षण पर्व : धूप दशमी पर मंदिरों में दर्शन कर किया धूप का खेवन।
खंडवा। अपने आप पर नियंत्रण करना ही सबसे बड़ा संयम है। अपने आप पर नियंत्रण किए बिना आत्म संयम नहीं होता और आत्म संयम के बिना हम मुक्त नहीं हो सकते। संयम पद में दो शब्द हैं एक सम दूसरा यम। सम शब्द का अर्थ है सम्यक प्रकार यम शब्द का अर्थ है दमन करना अर्थात दबाना। क्रोधादि कषायों को रोक देना भी संयम है। यह उद्गार पर्यूषण पर्व के उत्तम संयम धर्म पर प्रवचन देते हुए पं. संजय शास्त्री जैन बांसवाड़ा ने व्यक्त किए। महावीर दिगंबर जैन मंदिर में संयम धर्म पर प्रवचन देते हुए आयुषी दीदी ने कहा कि संयम का बंधन है स्वतंत्रता के लिए, अगर आप संसार से स्वतंत्र होना चाहते हैं तो संयम के बंधन में तो बंधना ही होगा, यह ऐसा बंधन है जो मनुष्य को स्वच्छंदता से बचाता है। आज सारा संसार इंद्रियों का दास बना हुआ है, बड़े-बड़े बलवान योद्धा और विचारशील विद्वान भी इंद्रियों के गुलाम बने हुए हैं और अपना अधिकतर समय इंद्रियों को तृप्त करने में लगाया करते हैं। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि जैन धर्म में पर्यूषण पर्व को महान पर्व मानकर सभी श्रद्धालु दस दिनों तक अपनी क्षमता के अनुसार जहां उपवास रखते हैं वहीं एकासना के साथ दस धर्म की पूजा अर्चना एवं प्रवचनों का लाभ उत्साह से उठा रहे हैं। समाज के कई तपसियों का निर्जला छठवा उपवास है। समाज के अलग-अलग मंडलों द्वारा पर्व के दौरान धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन मंदिरों में चल रहा है। समाज के सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि पर्व के दौरान सोमवार को धार्मिक उल्लास के साथ धूप दशमी का पर्व मनाया गया। सामाजिक बंधुओं ने परिवार सहित शाम 4 से 6 बजे तक सराफा स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर, बजरंग चौक स्थित महावीर जैन मंदिर, पड़ावा स्थित कहान आदिनाथ जैन मंदिर, सेठी नगर में चंद्रप्रभु जैन मंदिर, मोघट रोड स्थित आदिनाथ जैन मंदिर एवं नवकार नगर में मुनिसुव्रत जैन मंदिर में पहुंचकर धूप का खेवन किया एवं दर्शन कर पूजा अर्चना की। सुनील जैन ने बताया कि पयूर्षण पर्व का समापन 25 सितंबर को होगा। इस दिन शहर के प्रमुख मार्गो से यात्रा निकाली जाएगी। उत्तम संयम धर्म के प्रवचन एवं धूप दशमीं के अवसर पर समाज के विरेन्द्र जैन भट्यान, दिलीप पहाड़िया, पंकज छाबड़ा, विजय सेठी, सुनील जैन, कांतिलाल जैन, प्रकाशंचद जैन, दिलीप पहाडिय़ा, राजेन्द्र छाबड़ा, नितिन जैन, पंकज जैन महल, प्रेमांशु चौधरी, अविनाश जैन, पंकज सेठी, अमर लुहाडिय़ा, सुभाष सेठी, महेश जैन अतुल जैन, कांतिलाल जैन, दीपक सेठी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु उपस्थित थे।
