महालक्ष्मी (गौरी) उत्सव में घर आईं ज्येष्ठा-कनिष्ठा गौरी
विठ्ठल मंदिर के आष्टेकर परिवार में तीन दिवसीय उत्सव शुरू, शनिवार को होगा भावपूर्ण विसर्जन
खंडवा। महाराष्ट्रियन समाज का पारंपरिक महालक्ष्मी (गौरी) उत्सव गुरुवार से शुरू हो गया। श्री विठ्ठल मंदिर स्थित आष्टेकर परिवार में महालक्ष्मी के रूप में ज्येष्ठा और कनिष्ठा गौरी का आगमन हुआ। गुरुवार से शनिवार तक तीन दिवसीय उत्सव के दौरान विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि महालक्ष्मी पूजा महाराष्ट्रियन समाज की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। उत्सव के पहले दिन ज्येष्ठा और कनिष्ठा गौरी का आह्वान कर स्थापना की जाती है। इसके बाद माता का श्रृंगार नववारी साड़ी और विभिन्न आभूषणों से किया जाता है तथा गोद भराई की परंपरा भी निभाई जाती है।
तीन दिनों तक होंगे धार्मिक आयोजन
विट्ठल मंदिर में राम श्याम हॉस्पिटल परिवार के द्वारा मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है, उत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को महालक्ष्मी का पूजन, भोग-प्रसाद, श्रृंगार और ब्राह्मण भोज का आयोजन होगा। तीसरे दिन शनिवार को पोथी वाचन के बाद सायंकाल महालक्ष्मी को भावपूर्ण विदाई दी जाएगी।
परंपरा के अनुसार ज्येष्ठा और कनिष्ठा गौरी की प्रतिमाओं में अनाज भरा जाता है। प्रतिमाओं को सोलह श्रृंगार और नववारी साड़ी से सजाकर लक्ष्मी पद बनाते हुए विधि-विधान से स्थापना की जाती है।
सुनील जैन ने बताया कि महालक्ष्मी उत्सव के तीनों दिनों में महाराष्ट्रियन परिवारों में पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और पारिवारिक आस्था का वातावरण बना रहेगा। शनिवार शाम को पूजा-अर्चना के बाद माता का विसर्जन किया जाएगा।
