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हर्षा शर्मा के संयोजन में ‘प्राक् लोकमंथन-2026’ का भव्य आयोजन

हर्षा शर्मा के संयोजन में ‘प्राक् लोकमंथन-2026’ का भव्य आयोजन
लोक साहित्य के संरक्षण और संवर्धन पर हुआ मंथन, प्रवीण शर्मा ने लोकगीतों को बताया सांस्कृतिक धरोहर
खंडवा। लोक साहित्य को सहेजने, क्षेत्रीय बोलियों को प्रोत्साहित करने और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय साहित्य परिषद न्यास के तत्वावधान में ‘हम भारत के लोग’ विषय पर प्राक् लोकमंथन-2026 का आयोजन मोतीलाल नेहरू शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खंडवा में किया गया। कार्यक्रम की संयोजक एवं शिक्षाविद् हर्षा शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका में आयोजित इस साहित्यिक आयोजन में लोक संस्कृति, भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय एकात्मता के विभिन्न पहलुओं पर सारगर्भित चर्चा हुई।
हर्षा शर्मा ने लोक साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने पर दिया जोर
कार्यक्रम की संयोजक हर्षा शर्मा ने आयोजन के माध्यम से लोक साहित्य के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता को प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने साहित्यप्रेमियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और युवाओं को लोक परंपराओं से जोड़ने के महत्व को सामने रखा। आयोजन में साहित्य और शिक्षा जगत की सहभागिता ने क्षेत्रीय लोक विरासत को सहेजने के संकल्प को नई दिशा दी।
लोकगीतों में समाहित है हमारी सांस्कृतिक विरासत : प्रवीण शर्मा
मुख्य अतिथि न्यायपीठ बाल कल्याण समिति, खंडवा के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने कहा कि लोक साहित्य हमारी प्राचीन धरोहर और वैचारिक विरासत है। लोकगीतों में समाज की स्मृतियां, जीवन के अनुभव, संवेदनाएं और संस्कार सुरक्षित रहते हैं। इस विरासत को संकलित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि हमारी सांस्कृतिक पहचान अक्षुण्ण बनी रहे।
डॉ. तरुण दांगोड़े ने बताया लोक साहित्य का महत्व
मुख्य वक्ता माखनलाल चतुर्वेदी शासकीय स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय, खंडवा के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. तरुण दांगोड़े ने कहा कि लोक साहित्य भारतीय सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों का समन्वित स्वरूप है। यह लोकजीवन की अनुभूतियों और परंपराओं को अभिव्यक्ति देने के साथ समाज की सांस्कृतिक चेतना को भी समृद्ध करता है।
जयपुर में दिसंबर में होगा लोकमंथन-2026
विशिष्ट अतिथि एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के लोक साहित्य आयाम के अखिल भारतीय टोली सदस्य डॉ. देवदास साकेत ने लोकमंथन-2026 की अवधारणा और उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिसंबर में जयपुर में प्रस्तावित लोकमंथन के संदर्भ में प्राक् लोकमंथन का आयोजन किया जा रहा है। लोकगीत, लोकगाथा, लोककथा, लोकोक्तियों और क्षेत्रीय बोलियों के माध्यम से लोक स्मृतियों का संरक्षण करते हुए राष्ट्रीय एकात्मता को मजबूत करना इसका प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने लोक साहित्यकारों, कथाकारों, नाट्यकारों, शोधार्थियों, बाल साहित्यकारों और युवाओं से अपनी क्षेत्रीय बोलियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति देने का आह्वान किया।
डॉ. प्रवीण जोशी ने मालवी लोक साहित्य की विशेषताओं पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती मनीषा कसबी ने की।
कार्यक्रम में जयश्री तिवारी, सुनीता जोशी, मीरा व्यास, सविता गौर, श्रीमती कमला भद्रवाले, उमा भाटे, निशा अग्रवाल, सुनील चौरे, अरुण सातले, गणेश कागड़े, नारायण फ्राकले सहित जिले के साहित्यप्रेमी, साहित्य परिषद के पदाधिकारी, विद्यालय के शिक्षक, मातृशक्ति, युवा शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन आनंद जैन ने किया। अंत में संयोजक हर्षा शर्मा ने सभी अतिथियों, साहित्यप्रेमियों और सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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Tanish Gupta

वरिष्ठ संवाददाता 📍 खंडवा(मध्यप्रदेश)

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने वाले समाचार संवाददाता।

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