खंडवा जिला जेल में सलाखों के पीछे गूंजा बचपन, पिता की आंखों से छलका सैलाब।

गांधी जयंती पर खंडवा जिला जेल में 120 बंदियों की बच्चों से विशेष मुलाकात, किसी ने पिता की पीठ को घोड़ा बनाया तो किसी ने किया गरबा डांस।
खंडवा- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर खंडवा जिला जेल में इस बार एक ऐसा नवाचार किया गया, जिसने जेल की ऊंची दीवारों और लोहे की सलाखों के बीच भी रिश्तों की गर्माहट महसूस करा दी। लंबी सजा काट रहे सजायाफ्ता बंदियों को उनके बच्चों से विशेष मुलाकात कराई गई। प्रार्थना भवन में आयोजित यह मुलाकात कई परिवारों के लिए खुशी के साथ-साथ भावुक कर देने वाला क्षण बन गई।
कोई दादू की गोद में झूला, तो कोई पिता को बना बैठा घोड़ा
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि मुलाकात के दौरान जेल का माहौल सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग नजर आया। नन्हे बच्चे अपने पिता, ताऊ, और दादू से मिलकर बेहद खुश दिखाई दिए। कोई बच्चा अपने दादू की गोद में झूलता नजर आया तो कोई अपने पिता को घोड़ा बनाकर उनकी पीठ पर सवारी करता रहा। बच्चों की मासूम हंसी के बीच कई पिता अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए। किसी की आंखों में आंसुओं का सैलाब था तो किसी के चेहरे पर लंबे समय बाद बच्चों को देखकर खुशी साफ झलक रही थी। कुछ पल के लिए ऐसा लगा मानो जेल की दीवारें पीछे छूट गई हों और पिता अपने परिवार के बीच सामान्य जिंदगी जी रहे हों।
‘पापा, मैंने गरबा डांस सीखा है… आपको दिखाऊंगी’
मुलाकात के दौरान एक छोटी बच्ची ने अपने पिता से कहा कि उसने नवरात्रि के गरबा डांस की तैयारी की है और वह उन्हें अपना डांस दिखाना चाहती है। इसके बाद बच्चों ने अपने पिता के सामने डांस कर अपनी प्रतिभा दिखाई। पिता बच्चों को निहारते रहे और उनकी आंखों में गर्व और खुशी के भाव साफ दिखाई दिए।
विदाई के वक्त पिता ने बेटियों को दिया ‘बेस्ट ऑफ लक’
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि खुशी के इन पलों के बीच विदाई का समय सबसे ज्यादा भावुक करने वाला रहा। कुछ बच्चियों की 3 अक्टूबर से परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। जब वे जेल के गेट से बाहर निकल रही थीं, तब एक पिता ने अपनी बेटियों को आवाज देकर कहा—‘बेस्ट ऑफ लक, अच्छे से एग्जाम देना।’ पिता के इन शब्दों ने विदाई के उस पल को और भी भावुक बना दिया।
मिठाई, चॉकलेट और बैलून से बच्चों के चेहरे खिले
खंडवा जेल सुप्रीटेंडेंट देवेंद्र कुमार सारस खेल नियम के अनुसार कई प्रकार के नवाचार कर कैदियों को सुधारने का प्रयास करते रहते हैं, इस बार उन्होंने कैदियों के बच्चों से कैदियों को अपने बच्चों से मुलाकात करवाई, बच्चों के लिए मिठाई, चॉकलेट और बैलून की विशेष व्यवस्था की थी। बच्चों ने जेल प्रबंधन से मिली चॉकलेट अपने पिता के साथ भी साझा की। गांधी जयंती पर आयोजित इस विशेष मुलाकात में कुल 120 बंदियों को उनके बच्चों से मिलवाया गया।
‘बापू, तेरा जन्मदिन हर दिन आए…’
मुलाकात समाप्त होने के बाद जब बच्चों को उनके पिता से अलग किया जाने लगा तो माहौल एक बार फिर गमगीन हो गया। कई पिता अपने बच्चों को जाते हुए देखते रहे और बच्चे भी बार-बार पीछे मुड़कर अपने पिता को निहारते रहे। इस दौरान मानो हर आंख यही कह रही थी—‘बापू, तेरा जन्मदिन हर दिन आए, ताकि सलाखों के पीछे रहने वाले पिता अपने बच्चों से यूं ही मिलते रहें।’
श्राद्ध पक्ष में भी जेल के अंदर हुआ भावुक नवाचार
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया की खंडवा जिला जेल प्रबंधन ने दो दिन पहले श्राद्ध पक्ष के दौरान एक और नवाचार किया था। जेल के अंदर ही बंदियों के लिए श्राद्ध कर्म की व्यवस्था की गई, जिसमें 200 से अधिक बंदियों ने अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया। जेल में पहली बार हुई इस व्यवस्था के दौरान कई बंदी अपने पूर्वजों को याद कर भावुक हो गए।
स्वास्थ्य शिविर में बंदियों की जांच, दी गई दवाइयां
गांधी जयंती के अवसर पर जेल में विशेष स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया। सर्दी, खांसी, बुखार, दाँत दर्द और खुजली जैसी समस्याओं से पीड़ित बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उन्हें आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।
