जैन धर्म में किए गए उपवास कठिन तपस्या के साथ कर्मों की निर्जरा और आत्म शुद्धि का साधन हें।

पर्यूषण पर्व के दौरान समाज के कई श्रद्धालुओं ने 10,5,3 उपवास की तपस्या की।
दीदीयो और समाजजनो द्वारा अनुमोदना के साथ किया गया सम्मान।
खंडवा। जैन धर्म में उपवास का अर्थ केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि अपनी आत्मा के समीप वास करना और इंद्रियों कषायों (क्रोध,मान, माया, लोभ) पर नियंत्रण पाना है, यह कर्मों की निर्जरा और आत्म शुद्धि का मुख्य साधन है। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि जैन धर्म के महान पर्यूषण पर्व के अवसर पर जहां भाव भक्ति की गंगा बही वही कई श्रद्धालुओं ने अपनी क्षमता के अनुसार 3,5, 7 व 10 उपवास की तपस्या की छोटे बच्चों ने भी एक और दो दिन का उपवास रखा, उल्लेखनीय की जैन धर्म में जो उपवास किए जाते हैं पूरी तरह निर्जला होकर जल, अन्न,फल, फ्रूट सभी का त्याग रहता है, कठिन तपस्या के यह उपवास होते हैं। समाज सचिव सुनील जैन ने बताया कि पर्व के दौरान इस वर्ष ऋषभ कैलाश गंगवाल, रागिनी अनिल जैन सेठी नगर (बीड ) द्वारा 10 उपवास की तपस्या की गई। रिंकू सचिन छाबड़ा, संयम जितेंद्र लुहाड़िया 6 उपवास,कु.दीपिका पहाड़िया
स्वर्णकुमार जैन, मनीष पाटनी, श्रीमती शेफाली सौमीक जैन कु. रिद्धि बेनाडा द्वारा चार उपवास की तपस्या की गई। अविनाश जैन (सराफ) दीपक सेठी, सुनील काला, मा. जलज सचिन छाबड़ा,रमेश सेठी,अभिषेक रमेश जैन,श्रीमती रत्ना पंकज पाटनी, गौरव जैन, रचना प्रफुल्ल जैन,विशाल पाटनी,अवनि विशाल पाटनी, श्रेष्ठ मुकेश कुमार जैन, ज्योति सुशील जैन, सुशील जैन,मनोरमा सेठीस्ति नीरज सेठी,पूजा शिरीष टेमी, मा.गीतांश भरत छाबडा, कु. गुलिशा भरत छाबड़ा, कु. शिखा कोमल पहाड़िया, नीरज बैनाडा द्वारा तीन उपवास की तपस्या की गई।
14 वर्ष से कम आयु के बालक बालिका,आयुष सुशील जैन द्वारा 2 उपवास किए गए, एवं आरव सुशील जैन, उपवास. मा.अक्षत अमित जैन. कु.निव्वी आलोक जैन मा.स्मित आलोक जैन मा.तन्मय संदीप जैन मा.इशित आशीष जैन
मा. संयम सुमित जैन द्वारा एक उपवास की तपस्या की गई। बजरंग चौक स्थित जैन मंदिर में 10 और 5 पांच उपवास करने वाले तपसियों का सम्मान अनुमोदना करते हुए सांगानेर से पधारी आयुषी वारिधीद दीदी के साथ समाज जनों ने किया।
