पर्युषण पर्व का धार्मिक उल्लास के साथ हुआ समापन, शोभायात्रा के पश्चात भगवान का हुआ अभिषेक व शांतिधारा।
अनंत चतुर्दशी के दिन सभी मंदिरों में पूजन अभिषेक शांति धारा के साथ लाडू चढ़ाया गया।
खंडवा। दस दिनों से चल रहे पर्युषण पर्व की समाप्ति पर जैन धर्मशाला में दसवे दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर प्रवचन देते हुए बांसवाड़ा से पधारे संजय शास्त्री ने कहा कि जिस प्रकार मंदिर बनाने के बाद स्वर्ण कलश चढ़ाते हैं, उसी प्रकार यह ब्रह्मचर्य, धर्म पर चढ़ा हुआ स्वर्ण कलश है। पांच इंद्रियों को वशीभूत करके निरस्त करके, उनको अपने में समेटकर जो केवल अपनी शुद्ध आत्मा स्वरूप में ही रमण करता है, क्षण भर के लिए भी जिसकी दृष्टि बाहर नहीं है, वह आचरण ही ब्रह्मचर्य है। जो शील का 18 हजार अतिचार रहित पालन करते हैं, वस्तुत: वहीं ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करते हैं। व्यवहारिक दृष्टि से शारीरिक संयम का पालन करन, कामविकार को जीतना ब्रह्मचर्य व्रत है। विगत नौ दिनों से हम पर्व को हम धार्मिक उल्लास के साथ संयम और त्याग के रूप में मना रहे हैं। हमारा धर्म और संस्कृति हमें यह नहीं कहती कि हम दस दिन ही पर्व के दौरान परमात्मा की आराधना करें बल्कि अपनी नियमित दिनचर्या में आत्म साधना के लिए परमात्मा की शरण में अवश्य जाएं। महावीर दिगंबर जैन मंदिर उत्तम धर्म ब्रह्मचर्य धर्म पर प्रवचन देते हुए आयुषी दीदी ने कहा की धर्म के दस भेद पाप कर्म का नाश करने वाले और पुण्य का प्रादुर्भाव करने वाले हैं। संसार में धर्म की आराधना श्रेष्ठ है, धर्म की आराधना से ही व्यक्ति जीवन सुखी समृद्ध और लोक मंगल होता है। मर्यादा पुरूषोत्तम राम व सीता चौदह वर्ष तक यौवनावस्था में संयम से रहे। अपने शरीर से ऊपर उठने की कला का नाम ब्रह्मचर्य है। ज्ञान दर्शन से युक्त चैतन्य स्वभाव में डूब जाना, स्वयं को खोज लेना ही ब्रह्म की यात्रा है। भोगो से किसी को आज तक तृप्ति नहीं मिली क्योंकि एक बार भोगों का स्वाद जिसने चख लिया है फिर वह योग में नहीं डूब पाता। उसके मन में भागों की स्मृतियां बार-बार भोगतत्व की ओर ले जाती है।
समाज के सचिव सुनील जैन बताया कि हर्ष का विषय है कि इस वर्ष पर्युषण पर्व के दौरान हमें बांसवाड़ा से पधारे संजय जी शास्त्री एवं सांगानेर से पधारी आयुषी और वारिधी दीदी का सानिध्य प्राप्त हुआ और सभी सामाजिक बंधुओं ने पर्व के दौरान धर्म साधना करते हुए पूजा पाठ एवं प्रवचन का पुण्य लाभ प्राप्त किया। समाज के सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि पर्युषण पर्व के समापन दोपहर 3 बजे सराफा पार्श्वनाथ जैन मंदिर से शोभा यात्रा निकाली जो अलीगंज हरीगंज होते हुए मोघट रोड स्थित आदिनाथ जैन मंदिर पहुंची जहां कलश के पश्चात शोभायात्रा शिवाजी चौक जलेबी चौक बजरंग चौक होते हुए बजरंग चौक स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर पहुंची जहां दीदियों के प्रवचन के पश्चात भगवान का अभिषेक एवं शांति धारा की गई। शोभा यात्रा महावीर दिगंबर जैन मंदिर से विट्ठल मंदिर घंटाघर होते हुए सर्राफा पोरवाड़ जैन धर्मशाला पहुंची जहां पर्व के समापन पर संजय जी शास्त्री के प्रवचन हुए एवं भगवान के अभिषेक के साथ शांति धारा की गई,
समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि अनंत चतुर्दशी के दिन प्रातः सभी दिगंबर जैन मंदिरों में उत्तम ब्रह्मचर्य की पूजा के साथ भगवान का अभिषेक शांति धारा की गई एंव
वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस पर लाडू भी चढ़ाया गया।
समाज के सुनील जैन , प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पंडित निखिलेश जैन के निर्देशन में बड़ी शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रीमती राजकुमारी रूपांशु कुमार,सुधांशु कुमार स्व.विनय चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ,वासुपूज्य भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य अक्षत डॉ आशीष जैन परिवार को प्राप्त हुआ एवं श्री जी को 24 दीपको से आरती करने का सौभाग्य श्रीमती ज्योति सुशील कुमार बीड़ वाले को प्राप्त हुआ।
श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में वासुपूज्य भगवान को लाडू चढ़ाने का सौभाग्य दीपक रावका ,शाति धारा करने का सौभाग्य कैलाश पहाड़िया, तरुण लुहाड़िया, नीरज बैनाड़ा राजेश गंगवाल प्रदीप रावका परिवार को प्राप्त हुआ।
