आकिंचन्य का विरोधी है परिग्रह – सबसे बड़ा पाप परिग्रह है और आकिंचन सबसे बड़ा धर्म, “संजयजी शास्त्री”

आज अंतिम दिन ब्रह्मचर्य धर्म की होगी सुबह पूजा,दोपहर में पर्युषण पर्व की समाप्ति पर निकलेगी शोभायात्रा।
खंडवा। जिस प्रकार वृक्षों के पत्तों सींचने से पत्ते नहीं पनपते वरन जड़ को सींचने से ही पत्ते पनपते हैं। उसी प्रकार समस्त अंतरंग, बहिरंग, परिग्रह मिथ्यात्व रूपी जड़ से पनपते हैं। यदि हम चाहते हैं कि पत्ते सुख जाए तो पत्तों को तोडऩे से कुछ नहीं होगा, नवीन पत्ते निकल आएंगे। यदि जड़ काट दी जाए तो फिर समय पाकर पत्ते अपने आप सुख जाएंगे। इसी प्रकार मिथ्यात्व रूपी जड़ का काट देने पर बाकी के परिग्रह समय पाकर स्वत: छुटने लगेंगे। यह उदगार पर्युषण पर्व मे पोरवाड़ दिगम्बर जैन धर्मशाला सराफा में उत्तम आकिंचन्य धर्म पर प्रवचन देते हुए संजय जी शास्त्री ने व्यक्त किये। संजय जी शास्त्री ने कहा कि आकिंचन्य धर्म का धारण करना है अर्थात परिग्रह का त्याग करना है। जिस प्रकार क्षमा का विरोधी क्रोध, मार्दव का विरोधी मान है उसी प्रकार आकिंचन्य धर्म का विरोधी परिग्रह है अर्थात परिग्रह के अभाव से आकिंचन्य धर्म प्रकट होता है उसे पहले समझना आवश्यक है। मार्वल टीवी पर जैन मंदिर महावीर दिगंबर जैन मंदिर में सांगानेर से पधारी आयुषी वारिधी दीदी ने प्रवचन देते हुए कहा कि जब परिग्रह या त्याग की चर्चा चलती है तो हमारा ध्यान ब्राह्य परिग्रह की ओर ही जाता है। मिथ्यात्व, क्रोध, मान, माया, लोभ भी परिग्रह है इस ओर कोई ध्यान ही नहीं देता। क्रोध, मान, लोभ की जब भी बात आएगी तो कहा जाएगा कि यह तो कषाय हैं पर कषायों का भी परिग्रह होता है यह विचार नहीं आता। घोर पापों की जड़ मिथ्यात्व भी एक परिग्रह है जिसके छूटे बिना अन्य परिग्रह छूट ही नहीं सकते। परिग्रह सबसे बड़ा पाप और आकिंचन्य सबसे बड़ा धर्म है। संसार में जितने भी हिंसा, झूठ, चोरी कुशिल आदि होते हैं उन सब का कारण परिग्रह है। समाज की सचीव सुनील जैन ने बताया कि पर्यूषण पर्व का समापन 25 सितंबर अनंत चतुदर्शी के दिन सुबह ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा एवं दोपहर में शोभा यात्रा के साथ होगा। खंडवा के समस्त दिगंबर जैन मंदिरों में धार्मिक पुस्तक के साथ उत्साह के साथ पर्यूषण पर्व भक्ति भाव के साथ मनाए गए। सुनील जैन एवं प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि 25 सितंबर शुक्रवार अनंत चतुर्दशी के दिन पर सराफा पाश्र्वनाथ जैन मंदिर में प्रात: 9.45 बजे विशेष बड़ी शांतिधारा होगी। साथ ही वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस पर लाडू भी चढ़ाया जायेगा,
आज अंतिम दिन ब्रह्मचर्य धर्म की होगी पूजा होगी एवं दोपहर 3 बजे श्री पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सराफा से पर्युषण पर्व की समाप्ति पर शहर के विभिन्न मार्गों से शोभायात्रा निकलेगी। गुरुवार को श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शांतिधारा करने का सौभाग्य अनमोल कैलाश पहाड़िया परिवार ,अक्षत डॉ आशीष कुमार जैन एवं 9 उपवास की तपस्या करने वाले ऋषभ गंगवाल ने की।
