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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए झाबुआ में लगी कार्यशाला, कृषकों का हुआ सम्मान

प्राकृतिक कृषि अपनाकर जल, जंगल और जमीन का संरक्षण करें – मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया

 

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प्राकृतिक कृषि से बनेगा स्वस्थ समाज और समृद्ध किसान – कलेक्टर डॉ. भरसट

रिपोर्टर= भव्य जैन

झाबुआ, 19 जून 2026। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया के मुख्य आतिथ्य में कृषि विज्ञान केंद्र परिसर स्थित कृषक सभागृह, झाबुआ में प्राकृतिक कृषि विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्राकृतिक खेती के महत्व, पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि ग्रामीण जीवन और कृषि हमारी संस्कृति की मूल पहचान हैं। महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ खेती-किसानी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि झाबुआ एक जनजातीय जिला है, जहां की परंपराएं प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की सीख देती हैं। हमारे पूर्वजों ने हमें जल, जंगल, जमीन और स्वच्छ वातावरण की अमूल्य धरोहर सौंपी है। आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक कृषि को पुनः अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल कृषि पद्धति नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का माध्यम है, जिसके लिए सभी को समर्पण और मेहनत के साथ आगे आना होगा।

 

कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कहा कि किसान सदियों से प्रकृति के संरक्षक रहे हैं। जल, जंगल, जमीन एवं जैव विविधता के संरक्षण में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती कोई नई अवधारणा नहीं है। वर्ष 1960 के दशक में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता को देखते हुए उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरकों एवं सिंचाई आधारित कृषि को बढ़ावा दिया गया, जिससे देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना। वर्तमान समय की आवश्यकता केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, सूक्ष्म जीवों का संरक्षण करना तथा स्वस्थ समाज का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है।

 

प्रदर्शनी का अवलोकन

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में उद्यानिकी एवं कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती से संबंधित तकनीकों, बीजामृत, जैविक कृषि उत्पादों, ई-टोकन व्यवस्था तथा किसान पंजीयन संबंधी जानकारी प्रदर्शित की गई। प्राकृतिक कृषि से जुड़े कृषकों एवं संस्थाओं द्वारा भी अपने उत्पाद एवं नवाचार प्रस्तुत किए गए।

 

प्राकृतिक कृषि करने वाले कृषकों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने वाले कृषकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित कृषकों में ग्राम खेड़ी के श्री विमल भाबोर, सारसवाट के श्री नरेंद्रसिंह वसुनिया, नरसिंहपुरा के श्री दलसिंह परमार तथा ग्राम गुलाबपूरा के श्री रमेशचंद्र डामोर शामिल रहे।

 

कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य स्वर्गीय श्री शैलेंद्र सोलंकी के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

 

इस दौरान जनप्रतिनिधि, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जितेन्द्रसिंह चौहान, उप संचालक कृषि श्री एन एस रावत, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान तथा बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे।

 

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naveen dahayat

संपादकीय टीम (Editorial Team)

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने वाले समाचार संवाददाता।

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