*सद्भावना मंच ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को किया नमन*
*ओजस्वी लेखनी से राष्ट्रप्रेम और जनचेतना जगाने वाले दिनकर का साहित्य आज भी प्रासंगिक….प्रमोद जैन*
खंडवा।राष्ट्रकवि एवं महान साहित्यकार रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के उपलक्ष्य में सद्भावना मंच द्वारा मंच के कार्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया गया।उपस्थित सदस्यों ने उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया।
सद्भावना मंच सदस्य कमल नागपाल ने बताया कि इस अवसर पर सद्भावना मंच के संस्थापक प्रमोद जैन ने कहा कि रामधारी सिंह दिनकर केवल राष्ट्रकवि ही नहीं, बल्कि जनभावनाओं और राष्ट्र के स्वाभिमान को अपनी ओजस्वी लेखनी से स्वर देने वाले महान साहित्यकार थे।उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक चेतना, संघर्ष, स्वाभिमान और जनसरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति दिखाई देती है। “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” जैसी उनकी कालजयी पंक्तियां आज भी लोकतंत्र में जनता की शक्ति और जागरूकता का प्रभावशाली संदेश देती हैं।
उन्होंने कहा कि दिनकर जी का साहित्य नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी रचनाएं हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों के प्रति भी जागरूक करती हैं। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी महान साहित्यकारों की रचनाओं को पढ़े और उनके विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करे।
कार्यक्रम में प्रमोद जैन,सुरेंद्र गीते,अनूप शर्मा जगदीश चौरे,राधेश्याम शाक्य,गणेश भावसार,ओमप्रकाश बरोले त्रिलोक चौधरी,के.बी. मंसारे,अजय मंडलोई,कमल नागपाल,
अभिजीत तिवारी,श्वेता हरि सखी,विजया द्विवेदी,संदीप अंकिल, पी सी इंग्ले, रजत सोहनी, अशोक पारवानी, रामेन्द्र गंगराड़े,धीरज नेगी,सुभाष मीणा और कैलाश पटेल सहित सद्भावना मंच के सदस्य उपस्थित रहे।
