नई दिल्ली। दुनिया भर में चल रहे गंभीर संघर्षों (जैसे ईरान-सऊदी अरब, अमेरिका-ईरान) के बीच भारत ने ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे धुर विरोधी देशों को एक टेबल पर बिठाया. मई 2026 में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान और UAE के आपसी मतभेदों के कारण साझा बयान जारी नहीं हो पाया था. ऐसे माहौल में शीर्ष नेताओं के स्तर पर सर्वसम्मति से साझा डिक्लेरेशन पास करवाना भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक कामयाबी है.

भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित 18वां BRICS शिखर सम्मेलन रविवार को संपन्न हो गया। 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित इस सम्मेलन में BRICS देशों के नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों, आर्थिक सहयोग, शांति एवं सुरक्षा, तकनीक, जलवायु परिवर्तन और विकास से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। सम्मेलन के दौरान New Delhi Declaration को अपनाया गया, जिसमें वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की अधिक प्रभावी भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने दिया ठोस कार्रवाई का संदेश
सम्मेलन के समापन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS के भीतर हुए समझौतों और पहलों को वास्तविक धरातल पर उतारने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब चर्चा और दस्तावेजों से आगे बढ़कर लिए गए निर्णयों को लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने वाली कार्रवाई में बदलने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, जलवायु संकट और तकनीक तथा महत्वपूर्ण खनिजों के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
नई दिल्ली घोषणा-पत्र में इन मुद्दों पर जोर
BRICS देशों ने नई दिल्ली घोषणा-पत्र के माध्यम से बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, न्यायसंगत और प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
घोषणा-पत्र में आर्थिक सहयोग को मजबूत करने, सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई। हालांकि, इसके लिए सभी देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और परिस्थितियों का ध्यान रखने की बात कही गई है।
आतंकवाद और वैश्विक संघर्षों पर भी चर्चा
BRICS सम्मेलन में आतंकवाद और वैश्विक संघर्षों के मुद्दे भी प्रमुख रहे। नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। पश्चिम एशिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों के समाधान के लिए कूटनीति और संवाद को महत्व देने की बात कही गई।
स्वास्थ्य, AI और तकनीक पर बढ़ेगा सहयोग
BRICS देशों ने स्वास्थ्य, विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया। संक्रामक रोगों के लिए प्रारंभिक चेतावनी व्यवस्था, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान में सहयोग जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे।
इसके अलावा BRICS Science and Research Repository जैसी पहल के माध्यम से सदस्य देशों के बीच वैज्ञानिक ज्ञान और अनुसंधान सहयोग को बढ़ाने की दिशा में भी प्रगति का स्वागत किया गया।
भारत की अध्यक्षता की सराहना, 2027 में चीन संभालेगा कमान
BRICS देशों ने वर्ष 2026 में भारत की अध्यक्षता के दौरान की गई पहलों और आयोजित कार्यक्रमों की सराहना की। घोषणा-पत्र में भारत सरकार और भारतीय जनता के प्रति 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए आभार व्यक्त किया गया।
इसके साथ ही 2027 में BRICS की अध्यक्षता चीन को सौंपने और अगले BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी चीन में होने का समर्थन किया गया।
त्रिलोक दृष्टि की नजर
नई दिल्ली में संपन्न BRICS शिखर सम्मेलन को वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने, आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग बढ़ाने और बदलती वैश्विक परिस्थितियों में बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में लिए गए निर्णयों का वास्तविक क्रियान्वयन आने वाले समय में BRICS की भूमिका और प्रभाव को निर्धारित करने में अहम साबित होगा।
त्रिलोक दृष्टि
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