डिजिटल युग की गंभीर चुनौती पर एक अनूठी पहल: शासकीय उ०मा०वि० रुस्तमपुर में शिक्षिका श्रद्धा गुप्ता के मार्गदर्शन में मनाया गया ‘ई-कचरा दिवस’।
खंडवा। आधुनिक तकनीक और गैजेट्स के इस दौर में जहाँ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग हमारी जीवनशैली का अहम हिस्सा बन चुका है, वहीं इसके चलते उत्पन्न होने वाला ई-कचरा (E-Waste) पर्यावरण के लिए एक नासूर बनता जा रहा है। इसी गंभीर विषय पर जन-चेतना जगाने और बच्चों को पर्यावरण के प्रति जवाबदेह बनाने की दिशा में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रुस्तमपुर में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कई नवाचार के माध्यम से मुख्यमंत्री से सम्मानित विद्यालय की समर्पित शिक्षिका एवं इको क्लब प्रभारी श्रद्धा गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में विद्यालय में ‘ई-कचरा दिवस’ का भव्य और प्रेरणादायी आयोजन किया गया। बच्चों और युवाओं को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए जानी जाने वाली शिक्षिका श्रीमती श्रद्धा गुप्ता ने इस अनूठी पहल की कमान खुद संभाली। कार्यक्रम का आगाज़ करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण बात साझा की—”पुराने मोबाइल, चार्जर, बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को लापरवाही से कूड़े में फेंक देना हमारी मिट्टी और पानी को जहर दे रहा है। जब तक बच्चे और युवा खुद इसके सुरक्षित निस्तारण का जिम्मा नहीं उठाएंगे, तब तक प्रकृति को बचाना मुश्किल होगा।”
पहल के प्रमुख आयाम और गतिविधियाँ:
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि शिक्षिका के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने हाथों में संदेश देती तख्तियाँ और बैनर लेकर रुस्तमपुर क्षेत्र में एक प्रभावी जागरूकता रैली निकाली।
कचरे से कला और सीख : विद्यार्थियों ने पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिताओं के माध्यम से यह दर्शाया कि कैसे बेकार पड़े गैजेट्स को रीसायकल करके पर्यावरण को बचाया जा सकता है। श्रीमती गुप्ता ने स्वयं बच्चों के चित्रों का अवलोकन कर उनकी रचनात्मकता को सराहा।
समुदाय तक पहुँचा संदेश: इस गतिविधि का उद्देश्य केवल विद्यालय तक सीमित नहीं रहा; विद्यार्थियों ने अपने-अपने घरों और पड़ोस से बेकार इलेक्ट्रॉनिक सामान को चिन्हित कर उसके उचित पुनर्चक्रण (Recycling) का संकल्प लिया।
श्रीमती श्रद्धा गुप्ता की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि एक शिक्षक अपने दृढ़ संकल्प और रचनात्मकता से ठान ले, तो वह न केवल विद्यालय के बच्चों बल्कि पूरे समाज की सोच को एक नई दिशा दे सकता है।
