होम » India » नाग पंचमी पर नाग मंदिरों में उमड़ी आस्था, दूध चढ़ाकर किया नागदेवता का पूजन

नाग पंचमी पर नाग मंदिरों में उमड़ी आस्था, दूध चढ़ाकर किया नागदेवता का पूजन

नाग पंचमी पर नाग मंदिरों में उमड़ी आस्था, दूध चढ़ाकर किया नागदेवता का पूजन

सावन सोमवार के संयोग से मंदिरों में दिनभर रही भीड़, छड़ियां लेकर पहुंचे श्रद्धालु; देर रात तक दर्शन का क्रम

खंडवा। नाग पंचमी और सावन सोमवार के विशेष संयोग पर सोमवार को शहर में श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। सुबह से ही प्रमुख नाग मंदिरों में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। भक्तों ने नागदेवता की प्रतिमा पर दूध अर्पित कर पूजन-अर्चन किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि नाग पंचमी पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से छड़ियां लेकर श्रद्धालु नाग मंदिरों तक पहुंचे। मंदिरों में दिनभर धार्मिक आयोजन, आरती और प्रसादी वितरण का दौर चलता रहा।

प्रायोजित विज्ञापन (Sponsored Advertisement)

रामेश्वर कुंज के भीलट देव मंदिर में देर रात तक दर्शन

रामेश्वर कुंज स्थित भीलट देव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची। नाग पंचमी के अवसर पर बाबा का पूजन-अभिषेक कर दर्शन किए गए। मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था भी की गई। यहां देर रात तक दर्शन का क्रम चलता रहा। नाग पंचमी के दिन मंदिर में योगी परिवार के बबलू भाई, पवन भाई, विशाल भाई,सतीश भाई, दिलीप भाई, राहुल भाई योगी का विशेष सहयोग रहा।

छड़ियां लेकर पहुंचे श्रद्धालु

समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि आनंद नगर-दीनदयालपुरम स्थित नागलवाड़ी देवजी मंदिर सहित नाई आवार, ब्राह्मणपुरी नाग मंदिर, रामेश्वर और पानी दफ्तर की गली सहित विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु छड़ियां लेकर पहुंचे। छड़ी प्रमुख द्वारा छड़ी को स्नान कराने के बाद नागदेवता का पूजन किया गया। दोपहर में मंदिरों में महाआरती हुई, जिसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई।

घरों में बना दाल-बाटी का भोग

नाग पंचमी पर दाल-बाटी का विशेष महत्व माना जाता है। पर्व के चलते शहर के कई घरों में दाल-बाटी का भोग तैयार कर नागदेवता को अर्पित किया गया। परिवारों ने परंपरा के अनुसार नागदेवता का पूजन कर सुख-शांति की कामना की।

नाग पंचमी और सावन सोमवार का रहा विशेष संयोग

इस बार नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को होने से पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया। श्रद्धालुओं ने शिवालयों में जलाभिषेक के साथ नागदेवता का पूजन किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग पंचमी पर शिव आराधना और नागदेवता की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। कई श्रद्धालुओं ने महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया।

ओंकारेश्वर में साल में एक बार खुली नागदेवता की बाम्बी

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर स्थित नागदेवता की बाम्बी नाग पंचमी के अवसर पर साल में एक बार पूजन-अभिषेक के लिए खोली गई। मध्याह्न भोग के समय बाम्बी के पट खोले गए, जहां ट्रस्टीगण और नगरवासियों ने नागदेवता का पूजन किया। इसके चलते ओंकारेश्वर के नाग मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही रही।

जीवित सांपों को दूध नहीं पिलाने की अपील

धार्मिक परंपरा के अनुसार नागदेवता की प्रतिमा पर दूध अर्पित किया जाता है, लेकिन जीवित सांपों को जबरन दूध पिलाना उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। श्रद्धालुओं से प्रतिमा का पूजन करने और जीवित सर्पों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील की गई।

नाग पंचमी पर भूमि खुदाई से परहेज

नाग पंचमी के दिन खेत जोतने और जमीन की खुदाई नहीं करने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में निभाई गई। इसके पीछे भूमिगत जीवों की सुरक्षा से जुड़ी धार्मिक मान्यता है। पर्व ने धार्मिक आस्था के साथ जीव-जंतुओं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

📢

इस खबर को शेयर करें (Share This Story)

सत्य और निष्पक्ष पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए अपने दोस्तों और WhatsApp ग्रुप्स में साझा करें

WhatsApp Facebook X / Twitter Telegram

naveen dahayat

संपादकीय टीम (Editorial Team)

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने वाले समाचार संवाददाता।

« पिछली खबर (Previous)
नाग पंचमी पर शिवाजी चौक स्थित विट्ठल राव जी तलवारिया गादी पर उत्साह के साथ मना पर्व।
अगली खबर (Next) »
साधना उपाध्याय को छठवीं बार राष्ट्रपति के समक्ष गणगौर नृत्य की प्रस्तुति का अवसर।
WhatsApp अगली खबर →
⬇️ अगली खबर पढ़ने के लिए नीचे स्क्रॉल करें (Scroll down for next story)