# इच्छाओं की अधिकता मनुष्य के दुख का बड़ा कारण : स्वामी विवेकानंद परिव्राजक
**मन नियंत्रण, तनाव मुक्ति और पारिवारिक सुख-शांति पर व्याख्यान; आवश्यकताएं सीमित रखने और परिवार को समय देने पर जोर**
खंडवा। मनुष्य के जीवन में पशु-पक्षियों की तुलना में समस्याएं कम होने के बावजूद वह अधिक दुखी रहता है। इसका प्रमुख कारण मन पर नियंत्रण का अभाव और इच्छाओं की अधिकता है। यह बात साबरकांठा (गुजरात) के स्वामी विवेकानंद परिव्राजक ने माणिक्य स्मारक वाचनालय के तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान में कही। उन्होंने मन नियंत्रण, तनाव मुक्ति एवं परिवार में सुख-शांति विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मन पर नियंत्रण नहीं होने से अशांति और तनाव बना रहता है। पशु-पक्षियों में तनाव क्षणिक होता है, जबकि मनुष्य लंबे समय तक तनाव से घिरा रहता है।
स्वामी विवेकानंद परिव्राजक ने कहा कि इच्छाओं की अधिकता मनुष्य को परेशान करती है। अपनी आवश्यकताओं को सीमित करके ही जीवन में सुख और संतोष प्राप्त किया जा सकता है। स्वस्थ जीवन के लिए जल्दी सोना, जल्दी उठना और नियमित शारीरिक व्यायाम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ईश्वर का ध्यान और उपासना तनाव कम करने में सहायक हैं। आज की व्यस्त जीवनशैली में परिवार को समय देना भी बेहद आवश्यक है। पारिवारिक सुख-शांति के लिए मन पर नियंत्रण और जीवन में संतुलन जरूरी है।
**दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ**
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि महापौर अमृता यादव, अध्यक्ष मुकेश तनवे, लक्ष्मीनारायण भार्गव, दिनेश पालीवाल, भूपेंद्र सिंह चौहान एवं राजेंद्र भार्गव ने दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों का स्वागत सीमा भावसार, मनीषा पाटिल एवं डॉ. राधेश्याम पटेल ने किया।
कार्यक्रम में ममता बोरसे, चारु यादव, श्रुति जैन, सेवा दास पटेल, हरीश कोटवाले, सुनील जैन, योगेंद्र उपाध्याय, प्रशांत मिश्रा, धर्मेंद्र पालीवाल, मदनलाल सोनी, रितेश चौहान, संजय दुबे, मनोज जोशी, महेंद्र भार्गव एवं ब्रह्मानंद पाराशर सहित बड़ी संख्या में नगरजन उपस्थित रहे। संचालन समिति सचिव भूपेंद्र सिंह चौहान ने किया तथा आभार समिति उपाध्यक्ष राजेंद्र भार्गव ने माना।
