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जांच अधिकारी आए और चले गए, रिपोर्ट का इंतजार बरकरार; आखिर किस पर हुई कार्रवाई?

जांच अधिकारी आए और चले गए, रिपोर्ट का इंतजार बरकरार; आखिर किस पर हुई कार्रवाई?

कटघोरा। नगर पालिका परिषद कटघोरा में पाइपलाइन विस्तार कार्य को लेकर सामने आई शिकायत और कथित अनियमितताओं की जांच के बाद अब जांच रिपोर्ट को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शिकायत के बाद जांच अधिकारी मौके पर पहुंचे, जांच की और वापस लौट गए, लेकिन जांच में क्या निष्कर्ष सामने आया तथा जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है।

मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि नगर पालिका से जुड़े विभिन्न कार्यों में अनियमितताओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जांच के बाद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने में आखिर देरी क्यों हो रही है?

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अटलजी की प्रतिमा मामले में कार्रवाई, लेकिन सीएमओ की भूमिका पर सवाल बरकरार

वहीं, भारतरत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा से जुड़े मामले में सब इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी का निर्धारण किस स्तर तक किया गया। क्या केवल अधीनस्थ अधिकारी पर कार्रवाई पर्याप्त मानी गई या मामले में उच्च स्तर पर भी जवाबदेही तय की गई?

सबसे महत्वपूर्ण सवाल मुख्य नगरपालिका अधिकारी की भूमिका और उनके विरुद्ध कार्रवाई को लेकर बना हुआ है। यदि किसी कार्य में गंभीर अनियमितता पाई जाती है और अधीनस्थ अधिकारी पर कार्रवाई होती है, तो प्रशासनिक व्यवस्था में उच्च स्तर की जिम्मेदारी की भी जांच होना स्वाभाविक है। ऐसे में सीएमओ की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब अब तक सामने नहीं आया है।

आखिर किसके संरक्षण में बेखौफ हैं जिम्मेदार?

पाइपलाइन विस्तार से लेकर अटलजी की प्रतिमा तक उठे मामलों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। लोगों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह कौन-सा प्रभावशाली संरक्षण है, जिसके चलते सवालों के घेरे में आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही?

यदि संबंधित मामलों की जांच निष्पक्ष रूप से हुई है तो जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाने चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि किस अधिकारी की क्या जिम्मेदारी तय हुई और किसके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई।

उच्चाधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में

लगातार उठ रहे सवालों के बावजूद उच्चाधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जनता यह जानना चाहती है कि शिकायतों पर हुई जांच का परिणाम क्या निकला और दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई।

अब देखना होगा कि उच्चाधिकारी इन सवालों का जवाब कब देते हैं और जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक कर पूरे मामले में जवाबदेही तय करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।

फिलहाल यक्ष प्रश्न जस का तस है—
जांच हुई तो रिपोर्ट कहां है?
दोषी कौन पाया गया?
कार्रवाई किस पर हुई?
और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो क्यों?

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naveen dahayat

संपादकीय टीम (Editorial Team)

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने वाले समाचार संवाददाता।

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