पारंपरिक स्थापत्य शैली से हो रहा है पार्वतीबाई धर्मशाला स्थित मंदिर का पुनरुद्धार
खंडवा//
पार्वतीबाई धर्मशाला स्थित मुख्य मंदिर के संरक्षण एवं पुनरुद्धार का कार्य विरासत की मूल पहचान, पारंपरिक स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक महत्व को संरक्षित रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है। अपर कलेक्टर सुश्री श्रद्धा शुक्ला ने बताया कि मंदिर के पुनरुद्धार एवं निर्माण कार्य के दौरान इसकी प्राचीन स्थापत्य विशेषताओं को सुरक्षित रखते हुए उसे मजबूती प्रदान करने तथा उसकी मूल सुंदरता को पुनः स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का कार्य लगभग एक माह पूर्व प्रारंभ किया जा चुका है, तथा इसे मार्च 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
परंपरा और आधुनिक संरचनात्मक सुरक्षा का समन्वय
अपर कलेक्टर सुश्री शुक्ला ने बताया कि परियोजना की विशेषता यह है कि इसमें विरासत संरक्षण के सिद्धांतों को प्राथमिकता देते हुए पारंपरिक निर्माण एवं मरम्मत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। मंदिर की मौजूदा संरचना की स्थिति के अनुरूप संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण, दीवारों एवं पत्थर की चिनाई का संरक्षण, पारंपरिक चूना-आधारित प्लास्टर, पुराने दरवाजों एवं खिड़कियों का पुनरुद्धार तथा नक्काशीदार स्थापत्य तत्वों को संरक्षित करने जैसे कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा मंदिर के आंतरिक एवं बाहरी हिस्सों का पुनर्विकास, छत की वॉटरप्रूफिंग, जल निकासी व्यवस्था में सुधार, विद्युत व्यवस्था का उन्नयन तथा पारंपरिक स्थापत्य सौंदर्य के अनुरूप अन्य आवश्यक कार्य भी किए जा रहे हैं।
अपर कलेक्टर सुश्री शुक्ला ने बताया कि हमारा उद्देश्य केवल मंदिर का सौंदर्यीकरण करना ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक पहचान और स्थापत्य विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना भी है। मंदिर के इस संरक्षण कार्य में मूल निर्माण शैली और विरासत के अनुरूप सामग्रियों एवं तकनीकों को महत्व दिया जा रहा है, ताकि मंदिर की मौलिकता बनी रहे और संरचना की दीर्घकालीन स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि इस निर्माण कार्य के दौरान यह प्रयास किया जा रहा है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को आधुनिक स्वरूप देने के बजाय उनकी मूल पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए उन्हें संरचनात्मक रूप से सुरक्षित और उपयोग के लिए बेहतर बनाया जाए। उन्होंने बताया कि पारंपरिक निर्माण पद्धतियों और तकनीकी विशेषज्ञता के समन्वय से हमारी सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विरासत को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।


