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ढोल-मांदल की थाप पर थिरके हजारों कदम, चार घंटे में पूरी हुई आदिवासी समाज की महारैली।

ढोल-मांदल की थाप पर थिरके हजारों कदम, चार घंटे में पूरी हुई आदिवासी समाज की महारैली।

विश्व आदिवासी दिवस पर स्टेडियम ग्राउंड से निकली रैली, प्रमुख मार्गों से होते हुए पुरानी अनाज मंडी पहुंची।

खंडवा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को शहर में आदिवासी समाज की विशाल महारैली निकाली गई। स्टेडियम ग्राउंड से सुबह 11.30 बजे शुरू हुई महारैली करीब चार घंटे बाद शाम 3.30 बजे पुरानी अनाज मंडी पहुंची। रैली में बड़ी संख्या में युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और समाजजन आदिवासी वेशभूषा में शामिल हुए। ढोल-मांदल की थाप पर युवा जमकर थिरके और पूरे मार्ग में आदिवासी संस्कृति की झलक दिखाई दी। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि विश्व आदिवासी दिवस पर निकाली इस महा रैली में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए अपनी संस्कृति के अनुसार गीतों पर नृत्य करते हुए उत्साह के आनंद मे सरोबार थे। महारैली स्टेडियम ग्राउंड से शुरू होकर इंदिरा चौक, बस स्टैंड, बॉम्बे बाजार, घंटाघर और नगर निगम होते हुए बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थल पर पहुंची। यहां समाजजनों ने बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद रैली पुरानी अनाज मंडी पहुंची, जहां मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 1994 में प्रस्ताव पास करके हर वर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाने का निर्णय लिया, उसके अनुरूप प्रतिवर्ष पूरे देश भर में 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है, यह दिन आदिवासी समुदाय के मानव अधिकारों की रक्षा, उनकी अनूठी संस्कृति के संरक्षण और वैश्विक स्तर पर उनके सामने आने वाली सामाजिक व आर्थिक चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है।

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जगह-जगह हुआ महारैली का स्वागत

रैली के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर समाजजनों और नागरिकों ने महारैली का स्वागत किया। ढोल-मांदल और पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल युवाओं ने पूरे मार्ग में उत्साह का माहौल बनाए रखा। रैली में आदिवासी संस्कृति और एकजुटता का संदेश नजर आया।

शिक्षा के जरिए आगे बढ़ने का आह्वान

छात्र संघ के मनोज ओसवाल ने बताया कि महारैली के बाद पुरानी अनाज मंडी में मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आदिवासी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। प्रमुख वक्ता टी.आर. ब्राह्मणे ने समाज के युवाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा अच्छी तरह शिक्षा प्राप्त कर उच्च पदों पर पहुंचे और समाज के विकास में योगदान दें। हमें संस्कृति और भाषा का संरक्षण करना है स्वदेशी लोगों की अनोखी जीवन शैली, बोलिया और पारंपरिक ज्ञान को बचा कर रखना हें।अन्य वक्ताओं ने भी समाज की एकजुटता, शिक्षा और विकास को लेकर अपने विचार रखे साथ ही आदिवासी समुदायों को उनके जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार दिलाना भी है। कार्यक्रम का संचालन छात्र संघ के मनोज ओसवाल ने किया, जबकि आभार जयस जिलाध्यक्ष प्रेम अजनारे ने माना। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि विश्व आदिवासी दिवस पर निकली मा रैली एवं संबोधन कार्यक्रम में करण अलावा, मोहन मोगरे, रूपेंद्र सोलंकी, राहुल कनाडे, चंदू कनेश, कुंदर कावरे, संजय कन्नौजे, रोहित चौहान, अंतरसिंग डावर, कुँवरसिंग सोलंकी, नरेंद्र गोयल, ओमप्रकाश रावत सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और समाजजन मौजूद रहे।

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naveen dahayat

संपादकीय टीम (Editorial Team)

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने वाले समाचार संवाददाता।

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