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हमारा सच्चा हित, कल्याण और परम मंगल केवल मोक्षमार्ग में ही निहित है, ,,राजवीर शास्त्री,,

हमारा सच्चा हित, कल्याण और परम मंगल केवल मोक्षमार्ग में ही निहित है, ,,राजवीर शास्त्री,,

चल रहे अष्टानिका पर्व पर मंदिरों में किया जा रहा है जिनेंद्र अभिषेक,पूजन व शांतिधारा

खंडवा। मनुष्य के लिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि मोक्षमार्ग ही उसका वास्तविक हितकारी मार्ग है। संसार की समस्त वस्तुएँ, परिस्थितियाँ और सुविधाएँ देखने में चाहे कितनी ही आकर्षक एवं उत्तम प्रतीत हों, किंतु वे हमारे परम कल्याण का साधन नहीं बन सकतीं।उन्होंने स्पष्ट किया कि संसार की प्रत्येक वस्तु और प्रत्येक परिस्थिति प्रायः राग-द्वेष तथा कषायों को ही उत्पन्न करती है। इन्हीं कषायों के कारण जीव कर्मबंधन में निरंतर बँधता रहता है। जब तक राग, द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकार जीव के अंतःकरण में विद्यमान रहते हैं, तब तक वीतरागता का निर्मल भाव प्रकट नहीं हो सकता।
उक्त बात जैन आगम के युवा विद्वान राजवीर जी शास्त्री ने पोरवाड़ दिगम्बर जैन धर्मशाला में प्रवचन माला में अत्यंत प्रेरणादायक एवं आध्यात्मिक विचार प्रस्तुत किए।शास्त्री जी ने कहा कि आत्मा के शुद्ध स्वरूप का अनुभव तथा वास्तविक उपयोग की जागृति केवल मोक्षमार्ग के अनुसरण से ही संभव है। मोक्षमार्ग ही वह पावन पथ है, जिस पर चलकर जीव शाश्वत, अखंड एवं व्यापक सुख की प्राप्ति कर सकता है। यही मार्ग आत्मकल्याण, आत्मशुद्धि और अंततः मोक्ष की प्राप्ति का एकमात्र साधन है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें यह भली-भाँति समझ लेना चाहिए कि संसार भले ही देखने में अच्छा और आकर्षक प्रतीत होता हो, परंतु वह हमारे वास्तविक हित का साधन नहीं है। हमारा सच्चा हित, कल्याण और परम मंगल केवल मोक्षमार्ग में ही निहित है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में धर्म, स्वाध्याय, संयम और साधना को अपनाते हुए निरंतर मोक्षमार्ग पर अग्रसर होने का प्रयास करना चाहिए। यही मानव जीवन की सार्थकता तथा आत्मकल्याण का सर्वोत्तम मार्ग है।
समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया की मंगलवार से नगर के जिन मंदिरों में अष्टानिका पर्व की भक्तिमय शुरुआत हो गयी है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक मनाये जाने आठ दिवसीय इस पर्व के दौरान प्रतिदिन सभी जैन मंदिरों में भगवान का जलाभिषेक,शांतिधारा एवम नंदीश्वर द्वीप की पूजन एवम विधान आदि कार्यक्रम हुए।महिला पुरुषों ने उपवास,एकाशन आदि रखकर संयम व्रत का पालन भी किया।पर्व के मुख्य कार्यक्रम सराफा स्थित पोरवाड़ जैन मंदिर में सम्पन्न हो रहे है।
पोरवाड़ जैन समाज के मीडिया प्रभारी प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व के द्वितीय दिवस शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रीमती मंजुला,रौनक राहुल जैन अत्तर परिवार ने प्राप्त किया।इस अवसर पर वीरेंद्र भटयांण,रविन्द्र जैन,प्रेमांशु चौधरी,सुनील जैन,पुष्पेंद्र जैन,शिशोर जैन,डॉ शैलेन्द्र जैन, प्रेमांशु जैन अधिवक्ता, रूपांशु चौधरी,अनिकेत जैन,सौरभ जैन आदि समाजजन उपस्थित थे।

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naveen dahayat

संपादकीय टीम (Editorial Team)

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने वाले समाचार संवाददाता।

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