*मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध के पीछे राजनीतिक नहीं, वैचारिक कारण हैं : भीम सिंह गुर्जर*
**अनुच्छेद 370 हटाने और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन में निभाई गई भूमिका को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना**
**खंडवा।** भाजपा सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक भीम सिंह गुर्जर ने मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विरोध के पीछे केवल चुनाव संबंधी मुद्दे नहीं, बल्कि उनके प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निर्णयों से जुड़ी वैचारिक असहमति भी हो सकती है।
गुर्जर ने कहा कि श्री ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं अतिरिक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में उनकी प्रशासनिक भूमिका रही।
**अनुच्छेद 370 हटाने में रही महत्वपूर्ण भूमिका**
भीम सिंह गुर्जर के अनुसार, वर्ष 2016 में ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्त हुए थे। वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक तैयार करने की प्रक्रिया में उन्होंने महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाई। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक व्यवस्थाओं के संचालन में भी उनकी भूमिका रही।
**श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के गठन में योगदान**
गुर्जर ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया में भी ज्ञानेश कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। फरवरी 2020 में केंद्र सरकार द्वारा ट्रस्ट के गठन की घोषणा की गई थी। यह देश की आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय था।
**विपक्ष के विरोध पर उठाए सवाल**
भीम सिंह गुर्जर ने कहा कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगातार सवाल उठा रहा है। उनका मानना है कि इस विरोध के पीछे राजनीतिक और वैचारिक कारण भी हो सकते हैं। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि यदि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर आपत्ति है, तो उसे तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर सामने रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता और स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए। किसी भी अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि राजनीतिक विरोध के आधार पर।
अंत में गुर्जर ने कहा कि राष्ट्रहित, संवैधानिक व्यवस्था और देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में योगदान देने वाले अधिकारियों के कार्यों का मूल्यांकन निष्पक्षता से होना चाहिए। विपक्ष को भी लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए अपनी बात रखनी चाहिए।
