# रामा दादा निमाड़ के लोक साहित्य के संत थे, ,,गोविंद गुंजन,,
मप्र साहित्य अकादमी के आयोजन में पद्मश्री पं. रामनारायण उपाध्याय के व्यक्तित्व-कृतित्व पर हुई चर्चा, ‘लोकाचार’ पुस्तक का लोकार्पण।
खंडवा।खंडवा की साहित्यिक परंपरा में पद्मश्री पंडित रामनारायण उपाध्याय का योगदान अविस्मरणीय है। निमाड़ की लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक साहित्य को अपनी लेखनी से समृद्ध करने वाले रामा दादा को साहित्यकारों ने लोक का संत और खंडवा का ग्राम देवता निरूपित किया। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को आनंद नगर स्थित आनंद परिसर में मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया गया।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां शारदा के पूजन से हुआ। प्रारंभ में शिशिर उपाध्याय ने बीज वक्तव्य देते हुए रामा दादा की ग्राम कालमुखी से शुरू हुई साहित्य और लोक संस्कृति की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने दादा के साहित्यिक योगदान और निमाड़ की लोक परंपराओं से उनके गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार गोविंद गुंजन ने रामा दादा को लोक का संत बताया। उन्होंने कहा कि रामा दादा, माखनलाल चतुर्वेदी और पंडित रामनारायण उपाध्याय जैसे साहित्यकारों की परंपरा के कारण खंडवा साहित्यिक तीर्थ के रूप में पहचाना जाता रहा है। उन्होंने रामा दादा को खंडवा की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा व्यक्तित्व बताया।
वरिष्ठ साहित्यकार रघुवीर शर्मा ने कहा कि हरसूद में रामा दादा का सम्मान एक ऐतिहासिक प्रसंग रहा है, जिसमें देशभर के 21 साहित्यकार शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि खंडवा चार दादाओं का शहर है और रामा दादा निमाड़ी लोक साहित्य के दादा रहे हैं।
### साहित्यकारों ने साझा किए विचार
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि चर्चा के दौरान हेमलता उपाध्याय, हेमंत उपाध्याय, अनुजा उपाध्याय, गोविंदनारायण शर्मा, श्रीकांत साकल्ले, वीरेंद्र चौरे, संदीप बिरला, रघुवीर शर्मा और मनीष कुमार पाटीदार ने रामा दादा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने निमाड़ की लोक संस्कृति के संरक्षण और साहित्य के माध्यम से उसे जन-जन तक पहुंचाने में उनके योगदान को याद किया।
इस अवसर पर साहित्यकार हेमलता उपाध्याय की पुस्तक **‘लोकाचार’** का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन कवि संतोष तिवारी ने किया, जबकि आभार साहित्य परिषद के राकेश सिंह ने माना।
सुनील जैन ने बताया कि आयोजन में शहर के अनेक साहित्यकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इनमें शरद जैन, अशोक नेगी, मोरेश्वर राव मंडलोई, जगदीश चौरे, देवेंद्र जैन, अरुण सातले, कैलाश मंडलेकर, राजेंद्र उपाध्याय, विद्याधर मुले, शिव अरोरा, प्रो. शहजाद कुरैशी, शैलेंद्र शरण, दीपक चाकरे, सुधीर देशपांडे, मंगला चौरे, सुनील जैन, अशोक कास्बी, मनीषा कास्बी, साधना उपाध्याय, चंचला साकल्ले, आलोक शुक्ला और सुनील ताम्रकार सहित अन्य साहित्यप्रेमी शामिल हुए।
कार्यक्रम ने रामा दादा के साहित्यिक अवदान के साथ निमाड़ की लोक संस्कृति और खंडवा की समृद्ध साहित्यिक विरासत को स्मरण करने का अवसर प्रदान किया।
