अखिल भारतीय शिक्षा समागम 2026 के अंतर्गत शैक्षणिक गतिविधियाँ आयोजित।
खंडवा। मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खंडवा में प्राचार्य डॉ. सोमपाल सिंह के मार्गदर्शन में अखिल भारतीय शिक्षा समागम 2026 का आयोजन किया गया। समागम की मुख्य थीम ‘शिक्षा से विकसित भारत’ रही। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, रचनात्मकता, अभिव्यक्ति कौशल एवं समसामयिक विषयों के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि पैनल चर्चा में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। चर्चा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, कौशल विकास, रोजगार एवं उद्यमिता जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। प्रथम पैनल में एम.एससी. चतुर्थ सेमेस्टर की अलीना, बी.एससी. द्वितीय वर्ष के राजकुमार डावर, बी.ए. द्वितीय वर्ष के अंशुल कनाडे एवं बी.ए. प्रथम वर्ष के कुलदीप सांवनेर शामिल रहे। द्वितीय पैनल में बी.एससी. प्रथम वर्ष के सुरेश चौहान एवं रोहित तथा बी.कॉम. प्रथम वर्ष के राज तिवारी एवं सुजल मुजाल्दे ने विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा के साथ कौशल विकास, तकनीकी दक्षता एवं उद्यमशीलता आवश्यक हैं। तकनीक और परंपरा का समन्वय भारत को ज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सुनील जैन ने बताया समागम के अंतर्गत ‘शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग’ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शैक्षणिक लाभ, संभावनाओं एवं चुनौतियों पर पक्ष-विपक्ष में तार्किक विचार प्रस्तुत किए। विपक्ष में अंजलि विढारे प्रथम, आरुषि लाड द्वितीय एवं रंजिता बारे तृतीय रहीं, जबकि पक्ष में अक्षय विढारे प्रथम, सब्बीर अली द्वितीय एवं नामी मोरे तृतीय रहे।
‘2047 में शिक्षा की परिकल्पना’ विषय पर आयोजित डिजिटल पोस्टर प्रतियोगिता में 26 विद्यार्थियों ने डिजिटल माध्यम से भविष्य की शिक्षा एवं विकसित भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की। वहीं, ‘लोक संस्कृति एवं पर्यावरण’ विषय पर लघु नाटिका के माध्यम से लोक परंपराओं के संरक्षण, वृक्षों के महत्व, स्वच्छता एवं प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश दिया गया।
प्राचार्य डॉ. सोमपाल सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार, कौशल एवं सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करना भी है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ भारतीय संस्कृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अर्जित ज्ञान एवं कौशल का उपयोग समाज के कल्याण और राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया।
पैनल चर्चा के संयोजन में डॉ. पी.आर. वर्मा, प्रो. शर्मिला मीणा, डॉ. प्रतिभा चौरे एवं डॉ. परविंदर कौर खनूजा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के संयोजन में हिंदी विभाग की डॉ. मोक्षदा जोहरी, प्राणीशास्त्र विभाग के प्रो. विकास उपाध्याय एवं वाणिज्य विभाग के डॉ. अशोक कोचले का योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन प्रो. विकास उपाध्याय ने किया तथा अंत में डॉ. मोक्षदा जोहरी ने आभार व्यक्त किया।
समग्र रूप से समागम की गतिविधियों ने विद्यार्थियों में तकनीकी समझ, तार्किक क्षमता, रचनात्मक अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक चेतना, कौशल विकास एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित किया।
