कलेक्टर ने सिंचाई व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा की, नहरों की निगरानी और नियमित पेट्रोलिंग के निर्देश
हरदा। रबी फसलों की सिंचाई के लिए तवा नहर से 25 अक्टूबर 2026 से पानी छोड़ा जाएगा। संभागीय जल उपयोगिता समिति की बैठक में सिंचाई के लिए जल प्रवाह शुरू करने की तिथि निर्धारित की गई है। इसके अनुसार हरदा जिले में बाईं तट मुख्य नहर से 25 अक्टूबर, सिवनी मालवा में 27 अक्टूबर, इटारसी में 1 नवंबर तथा सोहागपुर में 5 नवंबर से नहरों के माध्यम से पानी छोड़ा जाएगा।
नर्मदापुरम संभाग के कमिश्नर श्री श्रीकांत बनोठ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में रबी फसलों की सिंचाई व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। बैठक में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को नहरों की साफ-सफाई, सुचारु जल प्रवाह और अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
नहरों की सुरक्षा और पेट्रोलिंग पर जोर
कमिश्नर ने निर्देश दिए कि नहरों से पानी छोड़े जाने की निर्धारित तिथियों का ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी कराकर प्रचार-प्रसार किया जाए। साथ ही किसान संगठनों के साथ समन्वय बनाकर किसानों को समय पर जानकारी दी जाए। नहरों में पानी के प्रवाह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने और प्रमुख स्थानों से लेकर टेल क्षेत्र तक लगातार पेट्रोलिंग करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि पानी का अपव्यय रोका जा सके और सभी किसानों को पर्याप्त पानी मिल सके।
बैठक में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता श्री राजाराम मीना ने बताया कि तवा जलाशय में वर्तमान में 1700 एमसीएम जल संग्रहित है, जो उपलब्ध भराव का लगभग 87 प्रतिशत है। उन्होंने नहरों की साफ-सफाई का कार्य जारी रहने की जानकारी भी दी।
कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
इधर, हरदा कलेक्टर श्री कुमार सत्यम एवं पुलिस अधीक्षक श्री शशांक ने जल संसाधन, विद्युत और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले में सिंचाई व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि तवा नहरों से सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति सुचारु रखी जाए और व्यवस्था में किसी प्रकार का व्यवधान न आने दिया जाए।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को लगातार मैदानी भ्रमण कर सिंचाई व्यवस्था पर निगरानी रखने के निर्देश दिए। वहीं, कमिश्नर ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने, निर्धारित समय पर बिजली उपलब्ध कराने तथा खाद की आपूर्ति और वितरण की सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि रबी फसलों की सिंचाई के दौरान किसानों को परेशानी न हो और नहरों के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी पहुंच सके।
