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आर्थिक तंगी के चलते एक माह की बेटी से अलग होने की नौबत, किलकारी शिशुगृह संचालक की समझाइश से अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया।

आर्थिक तंगी के चलते एक माह की बेटी से अलग होने की नौबत, किलकारी शिशुगृह संचालक की समझाइश से अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया।

आर्थिक तंगी के चलते एक माह की बेटी से अलग होने की नौबत, किलकारी शिशुगृह संचालक की समझाइश से अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया।

खंडवा। नवरात्रि में जहां घरों में कन्या पूजन की तैयारियां चल रही हैं, वहीं आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक दंपती के सामने अपनी महज एक माह की नवजात बेटी के पालन-पोषण को लेकर कठिन परिस्थिति सामने आई। परिवार की आर्थिक स्थिति और बच्ची के भविष्य को देखते हुए किलकारी शिशुगृह की संचालक ने दंपती को समझाइश दी कि बच्ची को कहीं असुरक्षित छोड़ने के बजाय नियमानुसार बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि उसे सुरक्षित संरक्षण मिल सके। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया की दंपती पहले से दो बेटियों और एक बेटे के माता-पिता हैं। आर्थिक परेशानियों के चलते वे नवजात बच्ची के पालन-पोषण को लेकर चिंतित थे। ऐसी स्थिति में किलकारी शिशुगृह की संचालक दीपमाला विधानी ने परिवार से संपर्क कर उन्हें समझाया कि बच्ची के हित और सुरक्षित भविष्य के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी है।
तीन दिनों तक समझाइश के बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत की बच्ची
महिला एवं बाल विकास अधिकारी के सहयोग से किलकारी शिशुगृह की संचालक ने तीन दिनों तक बच्ची के माता-पिता को समझाइश दी। उन्हें बताया गया कि किसी भी परिस्थिति में नवजात बच्ची को इधर-उधर या असुरक्षित स्थान पर नहीं छोड़ना चाहिए। यदि वे बच्ची का पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं, तो उसे झूले में छोड़ने के बजाय बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर नियमानुसार परित्याग की प्रक्रिया पूरी करानी चाहिए।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि समझाइश के बाद बच्ची को बाल कल्याण समिति, खंडवा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। चाइल्डलाइन के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई करते हुए बच्ची के परित्याग से संबंधित प्रक्रिया नियमों और विधि के अनुसार पूरी कराई गई, ताकि आगे की कार्रवाई बालिका के सर्वोत्तम हित में हो सके और उसे सुरक्षित संरक्षण मिल सके।
प्रीमेच्योर बच्ची खंडवा सिटी हॉस्पिटल के एसएनसीयू में भर्ती
नवजात बच्ची प्रीमेच्योर होने के कारण वर्तमान में खंडवा सिटी हॉस्पिटल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भर्ती है। यहां विशेषज्ञों की निगरानी में बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण, वजन और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल की जा रही है।
बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति, वजन तथा प्रीमेच्योर नवजात के लिए आवश्यक चिकित्सकीय मानकों और अन्य जरूरी औपचारिकताओं की पूर्ति के बाद ही उसे किलकारी शिशुगृह में लाया जाएगा। फिलहाल बच्ची की सेहत को प्राथमिकता देते हुए अस्पताल में उसकी देखभाल की जा रही है।
सुनील जैन ने बताया कि किलकारी शिशुगृह संस्था द्वारा एक दिन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए सुरक्षित संरक्षण, देखभाल और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य किया जाता है। संस्था में ऐसे बच्चों को आश्रय दिया जाता है, जिन्हें किसी कारणवश तत्काल पारिवारिक देखभाल नहीं मिल पा रही हो या जिनके माता-पिता उनका पालन-पोषण करने में असमर्थ हों।
संस्था की ओर से बच्चों के लिए सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, स्वच्छता, कपड़े, स्वास्थ्य परीक्षण, आवश्यक उपचार और उम्र के अनुसार देखभाल की व्यवस्था की जाती है। नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
एक दिन से छह वर्ष तक की आयु के बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास को ध्यान में रखते हुए संस्था द्वारा उनकी नियमित निगरानी की जाती है। बच्चों को स्नेहपूर्ण वातावरण देने के साथ-साथ उनकी शिक्षा, व्यवहारिक विकास और भविष्य की आवश्यकताओं पर भी ध्यान दिया जाता है। संस्था का प्रयास रहता है कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य का अवसर मिले।
संस्था में आने वाले बच्चों के संबंध में बाल कल्याण समिति, महिला एवं बाल विकास विभाग, चाइल्डलाइन और अधिकृत विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी के समन्वय से आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाती है। बच्चों की पहचान, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति और संरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं का परीक्षण करने के बाद ही उनके हित में आगे की कार्रवाई की जाती है। यदि किसी बच्चे के जैविक माता-पिता या परिजन उसकी देखभाल करने में सक्षम हों, तो नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया के तहत पुनर्वास पर भी विचार किया जाता है। वहीं, जिन बच्चों के लिए दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया लागू होती है, उनके मामले में भी सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।
“फेंके नहीं, हमें दें”—सुरक्षित भविष्य के लिए संस्था की अपील
किलकारी शिशुगृह का संदेश है—“फेंके नहीं, हमें दें।” संस्था का उद्देश्य ऐसे बच्चों को सुरक्षित संरक्षण दिलाना है, जिनके माता-पिता किसी कारणवश उनका पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं। संस्था संचालक की पहल का उद्देश्य भी यही है कि बच्ची असुरक्षित परिस्थितियों का शिकार न हो और उसे नियमानुसार स्वास्थ्य सुविधाएं, संरक्षण तथा भविष्य में परिवार मिलने का अवसर प्राप्त हो।
संस्था ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को कोई नवजात या छह वर्ष तक का बच्चा असुरक्षित स्थिति में दिखाई दे, तो उसे अकेला छोड़ने या स्वयं किसी अनधिकृत व्यक्ति को सौंपने के बजाय तुरंत बाल कल्याण समिति, चाइल्डलाइन, महिला एवं बाल विकास विभाग या अधिकृत संस्था को सूचना दें। बच्चे को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ-साथ उसकी जानकारी संबंधित विभाग को देना भी जरूरी है, ताकि उसकी सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित किए जा सकें।
यह मामला समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि आर्थिक तंगी या किसी अन्य कठिन परिस्थिति में नवजात को असुरक्षित स्थान पर छोड़ने के बजाय बाल कल्याण समिति, चाइल्डलाइन और अधिकृत विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी से संपर्क करना चाहिए। समय पर मिली समझाइश और सही प्रक्रिया किसी मासूम को सुरक्षित जीवन की दिशा दे सकती है।

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Tanish Gupta

वरिष्ठ संवाददाता 📍 खंडवा(मध्यप्रदेश)

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने वाले समाचार संवाददाता।

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