विश्व में शांति एवं सभी के कल्याण हेतु जैन मंदिर में चल रहा है नौ दिवसीय कल्याण मंदिर विधान।
कलश स्थापना, दीप प्रज्वलन और अष्टमंगल स्थापना के साथ हुआ प्रारंभ हुआ विधान।
खंडवा। प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी चल रहे नवरात्रि पर्व के साथ बजरंग चौक स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में 11 अक्टूबर से नौ दिवसीय कल्याण मंदिर विधान अध्यक्ष दिलीप पहाड़ियां एवं ममता कासलीवाल के मार्गदर्शन में चल रहा हें, समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि यह धार्मिक आयोजन 19 अक्टूबर तक चलेगा। प्रतिदिन अलग अलग पूजाकर्ता कमला रमेश रावका,संगीता पवन रावका, सपना जितेंद्र लोहाडिया, शकुंतला टीकमचंद बड़जात्या, सरोज, सुभाष, सचिन, पूजा,ममता सुनील जैन गदिया, मोक्षित मनन चंदाबाई कासलीवाल के साथ श्रद्धालु मंडल विधान की पूजा अर्चना कर अर्ग चढा रहे हैं, विधान के पहले दिन मंदिर में कलश स्थापना, दीप प्रज्वलन और अष्टमंगल स्थापना सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। आयोजन में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ लिया। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि कल्याण मंदिर स्तोत्र जैन धर्म का एक अत्यंत प्रसिद्ध, चमत्कारी और पावन संस्कृत स्तोत्र है। यह स्तोत्र जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ की स्तुति में लिखा गया है। स्तोत्र का पहला शब्द “कल्याण-मंदिर” है, इसलिए इसका नाम ‘कल्याण मंदिर स्तोत्र’ पड़ा है। इसे ‘पार्श्वनाथ स्तोत्र’ या ‘पार्श्वजिन स्तोत्र’ के नाम से भी जाना जाता है।
इस स्तोत्र का पाठ करने से मन को शांति, आत्मबल और मानसिक स्थिरता मिलती है।
मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करने से भय, रोग, संकट और पापों का नाश होता है। विधान के दौरान मंडल पर कलश स्थापना बबीता लोहाड़िया एवं सुभाषचंद्र लोहाड़िया ने की। पूजा का सौभाग्य प्रवीण कुमार गदिया, संगीता पहाड़िया, सतीश पहाड़िया, सरिता जैन, दीपांशु जैन, शीला बड़जात्या और शरद बड़जात्या को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्वलन नीलू लोहाड़िया, सुशील लोहाड़िया और अनिल लोहाड़िया ने किया।
धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत अष्टमंगल की स्थापना आयुषी, सीमा, रितु, इंदु, प्रियंका, तेजू, अलका, मीना और दिलीप पहाड़िया द्वारा की गई। विधान के प्रथम दिन की धार्मिक क्रियाओं में विधानकर्ता के रूप में श्रीमती कमला रावका एवं रमेश रावका शामिल रहे। समाजजनों ने सभी विधानकर्ताओं और धार्मिक क्रियाओं में सहभागी परिवारों की अनुमोदना की।
