#सफलता_की_कहानी
कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर से सफल इंटीग्रेटेड फिश कल्चर उद्यमी बने श्री चन्दन भोरगा
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नौकरी छोड़कर खुद का व्यवसाय शुरू करने की सोच रखने वाले युवाओं के लिए जिले के ग्राम चीराखान, तहसील पुनासा के युवा चन्दन भोरगा की कहानी प्रेरणादायक है। कभी रिलायंस जियो के ऑप्टिकल फाइबर प्रोजेक्ट में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में काम करने वाले चन्दन आज इंटीग्रेटेड फिश कल्चर के सफल उद्यमी बनकर सालाना लगभग 12 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं।
श्री चन्दन भोरगा पूर्व में रिलायंस जियो में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत थे, जहाँ उन्हें 25 से 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। लेकिन स्वयं का स्थायी व्यवसाय स्थापित करने और बेहतर आय की चाह में उन्होंने नौकरी छोड़कर मत्स्य पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। श्री भोरगा ने बताया की मत्स्य पालन विभाग खंडवा का तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं से मिली सहायता उनके लिए मजबूत आधार बनी। श्री भोरगा ने 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन तालाब का निर्माण कराया, जिसके लिए उन्हें 3.30 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ।मत्स्य पालन को आधुनिक स्तर पर ले जाने के लिए उन्होंने मध्यम आरएएस टैंक सिस्टम स्थापित किया, जिसके लिए 15 लाख रुपये की सहायता मिली। वहीं मत्स्य बीज, आहार और अन्य आवश्यकताओं के लिए मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 9.20 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ।
श्री चन्दन भोरगा ने कहा की केवल मछली पालन तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इंटीग्रेटेड फिश कल्चर मॉडल अपनाया। इसके तहत हाई डेंसिटी मत्स्य पालन के साथ-साथ बकरी पालन, मुर्गी पालन एवं हॉर्टिकल्चर का समन्वित संचालन किया जा रहा है। श्री भोरगा ने वैज्ञानिक प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित आहार और आधुनिक आरएएस तकनीक से मत्स्य उत्पादन आज लगभग 30 टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा की वर्तमान में व्यवसाय का वार्षिक टर्नओवर लगभग 33 लाख रुपये है, जिसमें से लगभग 12 लाख रुपये शुद्ध वार्षिक आय है, यानी औसतन 1 लाख रुपये प्रतिमाह। श्री चन्दन भोरगा ने कहा कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और शासकीय योजनाओं के सही उपयोग से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में स्वरोजगार के बेहतर अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
