पढ़ना है, पता है।काम पूरा करना है पता है। फिर भी हाथ मोबाइल की तरफ क्यों चला जाता है?
रात को सोने से पहले आपने तय किया—“कल सुबह जल्दी उठूँगा और पूरे मन से पढ़ाई करूँगा।”
सुबह अलार्म बजता है। आप उठते हैं, मोबाइल हाथ में लेते हैं और सोचते हैं— “बस पाँच मिनट…”
फिर एक वीडियो, एक Reel, एक message…और पता ही नहीं चलता कि आधा घंटा निकल गया।
फिर मन में आता है—“मुझे पता था कि मुझे पढ़ना चाहिए। फिर मैंने किया क्यों नहीं?”
यही सवाल procrastination यानी काम टालने की आदत को समझने की शुरुआत है।
परीक्षा पास है, office की report pending है या assignment जमा करना है, फिर भी हम कहते हैं, “बस 10 मिनट बाद शुरू करता हूँ।” 
मनोविज्ञान में इसे Procrastination कहा जाता है। इसका एक कारण है Present Bias—हम अक्सर भविष्य के बड़े फायदे की तुलना में अभी मिलने वाले छोटे सुख को ज्यादा महत्व देते हैं। Reel अभी खुशी देती है, जबकि पढ़ाई का फायदा बाद में मिलता है।
आज का सवाल
आप आज कौन सा काम टाल रहे हैं?
उसे पूरा करने के बारे में मत सोचिए। बस उसका पहला 10 मिनट वाला कदम तय कीजिए।
**क्योंकि शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन उसका असर बहुत बड़ा हो सकता है।**
