मनरेगा संविदा कर्मियों ने नियमितीकरण की मांग तेज की
राजस्थान में वर्ष 2005 से कार्यरत मनरेगा संविदा कर्मियों का नियमितीकरण अब भी अधर में लटका हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हुई। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संविदात्मक पदों को नियमित पदों में परिवर्तित करने की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियां जारी होने के बावजूद सेवा नियम अब तक लागू नहीं हो पाए हैं। संघ के प्रदेशाध्यक्ष दिनेश मीणा ने बताया कि सेवा नियमों की फाइल पिछले दो माह से अधिक समय से वित्त विभाग में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि 1 जुलाई 2026 से प्रदेश में मनरेगा के स्थान पर “वीबी-जी राम जी” योजना लागू होने जा रही है। यदि सरकार शीघ्र नियमितीकरण नहीं करती, तो प्रदेशभर के मनरेगा संविदा कर्मचारी नई योजना का बहिष्कार करेंगे। कर्मचारियों ने 16,900 रुपये के अल्प मानदेय को भी वर्तमान समय में अपर्याप्त बताते हुए सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है