*वेदना से संवेदना तक समन्वय आज और कल की जरूरत : प्रवीण शर्मा*

*राज्य न्यायिक अकादमी में बाल संरक्षण पर मंथन, जमीनी समस्याओं के समाधान पर जोर*
खंडवा/जबलपुर, 3 अक्टूबर। बाल संरक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए कानून के साथ संवेदनशीलता और सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। यह बात बाल कल्याण समिति, खंडवा के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी, जबलपुर में 2 एवं 3 अक्टूबर को आयोजित कार्यशाला में कही।
उन्होंने कहा कि “वेदना से संवेदना तक समन्वय आज और कल की जरूरत है।” बच्चों को केवल प्रकरण संख्या के रूप में नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, शिक्षा, मानसिक स्थिति, पुनर्वास और परिवार से पुनर्मिलन के दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
शर्मा ने बाल गृह, बालिका गृह एवं दिव्यांग बच्चों के लिए पर्याप्त संस्थाओं की कमी के साथ बाल कल्याण समितियों के लिए बाल सहयोगी भवन, पृथक परामर्श कक्ष, फर्नीचर, कंप्यूटर, प्रिंटर, स्टेशनरी तथा बच्चों के लिए पेयजल एवं पोषण संबंधी सुविधाओं की आवश्यकता भी उठाई। उन्होंने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से सहयोग की अपेक्षा की।
कार्यशाला में डॉ. कल्पना पुरुषोत्तमन, संस्थापक मानस वेलनेस सेंटर एवं राष्ट्रीय प्रशिक्षक, रचना त्यागी, अधिवक्ता एवं एथिकस लीगल एंड कंसल्टिंग सॉल्यूशंस, जेएन कंसोटिया, पूर्व आईएएस एवं पूर्व प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग, स्नेहा सिंह, अधिवक्ता नई दिल्ली, गोविंद बेनीवाल, बाल संरक्षण अधिकारी, गुरमुख लांबा, वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार, किशोर न्याय समिति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, अनु सिंह, संकाय सदस्य, मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी तथा अनिल मलिक, सचिव, किशोर न्याय समिति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया।
कार्यशाला में किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, परिवीक्षा अधिकारी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई सहित विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय और बाल-केंद्रित कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श हुआ।
वेदना से संवेदना तक समन्वय आज और कल की जरूरत : प्रवीण शर्मा*
Tanish Gupta
वरिष्ठ संवाददाता
📍 खंडवा(मध्यप्रदेश)
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने वाले समाचार संवाददाता।
