क्या आपने कभी कोई नया शब्द सीखा है और अचानक वह आपको हर जगह दिखने लगा है?
शायद दुनिया नहीं बदली, आपका ध्यान बदल गया है।
मस्तिष्क को बहुत अधिक संवेदी जानकारी (sensory information) मिलती है, जिसे हम होशपूर्वक प्रोसेस नहीं कर सकते। चयनात्मक ध्यान (selective attention) पर किए गए शोध से पता चलता है कि हमारा फोकस इस बात को कितनी गहराई से प्रभावित करता है कि हमारी चेतना तक क्या पहुँचता है। प्रसिद्ध “इनविजिबल गोरिल्ला“ प्रयोगमें, कई प्रतिभागी किसी अन्य कार्य पर ध्यान केंद्रित करते समय एक अप्रत्याशित घटना को देखने से चूक गए थे।
रेटिक्युलर एक्टिवेटिंग सिस्टम (RAS) उत्तेजना और ध्यान में योगदान देता है, हालांकि इसे एक ऐसे अकेला “फ़िल्टर“ के रूप में मानने का लोक प्रिय विचार जो हमारे द्वारा देखी जाने वाली हर चीज़ को नियंत्रित करता है, एकअति सरलीकरण (oversimplification) है।

छात्रों के लिए व्यावहारिक सबक सरल है: अपने ध्यान को एक लक्ष्य दें।
पढ़ाई करने से पहले पूछें:“मैं वास्तव में क्या समझने की कोशिश कर रहा हूँ ?”
फिर एक सरल एंकर (anchor) का उपयोग करें: ध्यान केंद्रित स्पष्टता के एक पल को याद करें, अपने अंगूठे और तर्जनी को आपस में हल्के से दबाएं, सांस लें और शुरुआत करें।
ध्यान हर चीज़ पर ध्यान देने के बारे में नहीं है।
यह जान बूझ कर उन चीज़ों पर ध्यान देने के बारे में है जो वास्तव में मायने रखती हैं।
