दो दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में जोरदार वापसी, Sensex 333 अंक उछला; Nifty 23,200 के पार, फिर भी निवेशकों की दौलत घटी
16 सितंबर 2026। भारतीय शेयर बाजार में लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद बुधवार को राहत की तेजी देखने को मिली। कारोबार के अंत में BSE Sensex 333 अंक की बढ़त के साथ 74,336 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 50 करीब 99 अंक चढ़कर 23,218 के स्तर पर पहुंच गया। इससे मंगलवार की तेज गिरावट के बाद बाजार में कुछ हद तक सुधार देखने को मिला।
शुरुआत से ही बाजार में दिखी मजबूती
बुधवार के कारोबार में सेंसेक्स एक समय करीब 502 अंक तक ऊपर चला गया था। निफ्टी ने भी दिन के दौरान 23,285 के आसपास का ऊपरी स्तर छुआ। बैंकिंग और बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला। ITC, SBI, HDFC Bank, Axis Bank, ICICI Bank, Mahindra & Mahindra और Kotak Mahindra Bank जैसे प्रमुख शेयरों में मजबूती देखने को मिली।
हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार की शुरुआती तेजी कुछ कम हुई और कारोबार अंततः सीमित बढ़त के साथ बंद हुआ।
मंगलवार की भारी गिरावट के बाद मिली राहत
इससे एक दिन पहले यानी 15 सितंबर को बाजार में तेज बिकवाली हुई थी। Sensex करीब 778 अंक टूटकर 74,003.82 पर बंद हुआ था, जबकि Nifty 50 करीब 279 अंक गिरकर 23,118.60 पर पहुंच गया था। Nifty का यह स्तर लगभग पांच महीने का निचला स्तर था। (Reuters)
मंगलवार की गिरावट के दौरान BSE में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में करीब 9 लाख करोड़ रुपये की कमी आने की रिपोर्ट सामने आई थी। ऐसे में बुधवार की तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत जरूर दी, लेकिन पिछले सत्र के नुकसान की पूरी भरपाई नहीं हो सकी।
बाजार की तेजी के पीछे कौन से कारण रहे?
बुधवार को बाजार को मुख्य रूप से बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में खरीदारी से समर्थन मिला। इसके अलावा कुछ डिजिटल पेमेंट कंपनियों और चुनिंदा बड़े शेयरों में तेजी ने भी प्रमुख सूचकांकों को सहारा दिया। (Reuters)
बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक और उसके ब्याज दर संबंधी संकेतों पर भी बनी हुई है। वैश्विक ब्याज दरों में बदलाव का असर विदेशी निवेश, डॉलर और उभरते बाजारों पर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमत अभी भी बड़ी चिंता
शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक इस समय कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। मध्य-पूर्व में जारी तनाव और आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं के कारण Brent crude करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई, व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव बढ़ने की चिंता रहती है। (Reuters)
मंगलवार की गिरावट में भी महंगा कच्चा तेल और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रहे थे। (Reuters)
रुपये और विदेशी निवेश पर भी बाजार की नजर
बाजार में निवेशकों की निगाह रुपये की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर भी है। वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ने और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता का असर उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है।
ऐसे माहौल में बुधवार की तेजी के बावजूद बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और निवेशक वैश्विक संकेतों को लगातार ट्रैक कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बुधवार की तेजी को फिलहाल दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद बाजार की रिकवरी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि केवल एक दिन की तेजी से बाजार की दिशा में स्थायी बदलाव की पुष्टि नहीं होती।
आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगे।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यह खबर केवल बाजार की गतिविधियों और उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों की जानकारी देने के उद्देश्य से है।
