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पार्श्वनाथ जिनालय सराफा खण्डवा में बुधवार को भक्तिभाव पूर्वक हुआ भव्य चंदेवा एवम 64 चंवर का हुआ अर्पण

पार्श्वनाथ जिनालय सराफा खण्डवा में बुधवार को भक्तिभाव पूर्वक हुआ भव्य चंदेवा एवम 64 चंवर का हुआ अर्पण

पार्श्वनाथ मंडल विधान के साथ भक्तिपूर्वक भगवान की आरती

खंडवा/
पोरवाड़ युवा ओटला मंच खण्डवा के युवा साथियों के अथक प्रयास एवम समाज के विभिन्न दान दातारों के विशिष्ट सहयोग से बुधवार को प्रातः 8 बजे से श्री पार्श्वनाथ जिनालय सराफा में मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान के समोशरण के समक्ष भव्य चंदेवा, 64 चँवर एवम स्वर्ण-रजतमयी छत्र अर्पित किये गये।इस अवसर पर पं. निखलेश जैन के निर्देशन में संगीतमय पार्श्वनाथ विधान का आयोजन भी किया गया।
समाज के मीडिया प्रभारी प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि इस चंदेवा मे जबलपुर स्थित प्रतिभास्थली की ब्रह्मचारिणी दीदियों द्वारा अपने हाथों से अद्भुत ज़रदोज़ी वर्क के द्वारा पंच परमेष्ठी और मंगल कलश उकेरे गये हैं।साथ ही आकर्षक विद्युत सज्जा से सज्जित इस चंदेवा मे पंचरंगी 64 चंवर भी विराजमान किये गये हैं जो कि उ.प्र. के हाथरस में निर्मित किये गये है। चारो तरफ नवकार महामंत्र के साथ ही अष्ट मंगल द्रव्य सी इन सी कटिंग के द्वारा बनाये गए हैं। समाजजनों से निवेदन है कि इस सुंदर भव्य आकर्षक प्रातिहार्य को निहारने सराफा स्तिथ पार्श्वनाथ जिनालय अवश्य पहुँचे। इस चंदेवे के साथ आकर्षक छत्र श्रीमती नैनश्री संतोष जैन ,गौरव कुमार सौरभ कुमार जैन परिवार द्वारा अर्पण किया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रभावना का वितरण अविनाश कुमार अंकित कुमार सराफ परिवार द्वारा किया गया।

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दिगम्बर जैन मंदिर के चंदेवा का महत्व"
प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि दिगम्बर जैन मंदिर में मूर्ति के ऊपर लगे अलंकृत छत्र या मुकुट को चंदेवा (या छत्रत्रय) कहा जाता है इसके जैन मान्यता के हिसाब से बहुत महत्व हैं।
तीन लोकों का प्रतीक: चंदेवा मूलतः तीन छत्रों का समूह होता है, जो जैन धर्म में तीन लोकों (ऊर्ध्वलोक, मध्यलोक और अधोलोक) को दर्शाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि भगवान इन तीनों लोकों के स्वामी और नाथ हैं।
अतिशय/दिव्यता का बोध: शास्त्रों के अनुसार, जब किसी आत्मा को पूर्ण ज्ञान (केवलज्ञान) की प्राप्ति होती है, तो देवगण आकाश में रत्नों से जड़े तीन छत्रों की रचना करते हैं। यह भगवान के सर्वोच्च, वीतरागी और पूजनीय होने का प्रमाण है।"
त्रिरत्न की प्रेरणा: ये तीन छत्र जैन धर्म के मूल आधार—सम्यक् दर्शन,सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र (त्रिरत्न) का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।

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naveen dahayat

संपादकीय टीम (Editorial Team)

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने वाले समाचार संवाददाता।

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